श्वस्तस्याः प्रियमाप्तुसुद्धुरधियो धाराः सृजन्त्या रया-
न्नम्रोन्नम्रकपोलपालिपुलकैर्वेतस्वतीरस्रुणः ।
चत्वारः प्रहराः स्मरार्तिभिरभूत्सापि क्षपा दुःक्षया
तत्तस्यां कृपयाखिलैव विधिना रात्रिस्त्रियामा कृता ॥
श्वस्तस्याः प्रियमाप्तुसुद्धुरधियो धाराः सृजन्त्या रया-
न्नम्रोन्नम्रकपोलपालिपुलकैर्वेतस्वतीरस्रुणः ।
चत्वारः प्रहराः स्मरार्तिभिरभूत्सापि क्षपा दुःक्षया
तत्तस्यां कृपयाखिलैव विधिना रात्रिस्त्रियामा कृता ॥
न्नम्रोन्नम्रकपोलपालिपुलकैर्वेतस्वतीरस्रुणः ।
चत्वारः प्रहराः स्मरार्तिभिरभूत्सापि क्षपा दुःक्षया
तत्तस्यां कृपयाखिलैव विधिना रात्रिस्त्रियामा कृता ॥
अन्वयः
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श्वः प्रियम् आप्तुम् उद्धुर-धियः, रयात् नम्र-उन्नम्र-कपोल-पालि-पुलकैः अस्रुणः वेतस्वतीः धाराः सृजन्त्याः तस्याः स्मर-आर्तिभिः चत्वारः प्रहराः (युगवत् अभूवन्) । सा क्षपा अपि दुःक्षया अभूत् । तत् विधिना कृपया तस्यां अखिला रात्रिः एव त्रियामा कृता ।
Summary
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For her, whose mind was eager to meet her beloved the next day and who shed streams of tears, the four watches of that night, filled with the pangs of love, became unbearable. Therefore, fate, out of compassion, made the entire night seem as if it had only three watches.
पदच्छेदः
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| श्वः | श्वस् | Tomorrow |
| तस्याः | तद् (६.१) | her |
| प्रियम् | प्रिय (२.१) | beloved |
| आप्तुम् | आप्तुम् (√आप्+तुमुन्) | to obtain |
| उद्धुरधियः | उद्धुर–धी (६.१) | of her whose mind was eager |
| धाराः | धारा (२.३) | streams |
| सृजन्त्याः | सृजन्त् (√सृज्+शतृ, ६.१) | of her who was shedding |
| रयात् | रय (५.१) | from the force |
| नम्रोन्नम्रकपोलपालिपुलकैः | नम्र–उन्नम्र–कपोल–पालि–पुलक (३.३) | by the horripilations on the surface of her cheeks, alternately drooping and rising |
| वेतस्वतीः | वेतस्वती (२.३) | like the Vetravati river |
| अस्रुणः | अस्र (६.१) | of tears |
| चत्वारः | चतुर् (१.३) | four |
| प्रहराः | प्रहर (१.३) | watches of the night |
| स्मरार्तिभिः | स्मर–आर्ति (३.३) | with the pangs of love |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
| सा | तद् (१.१) | that |
| अपि | अपि | also |
| क्षपा | क्षपा (१.१) | night |
| दुःक्षया | दुःक्षया (१.१) | difficult to pass |
| तत् | तद् | therefore |
| तस्यां | तद् (७.१) | for her |
| कृपया | कृपा (३.१) | out of compassion |
| अखिला | अखिल (१.१) | entire |
| एव | एव | indeed |
| विधिना | विधि (३.१) | by fate |
| रात्रिः | रात्रि (१.१) | night |
| त्रियामा | त्रियामा (१.१) | consisting of three watches |
| कृता | कृत (√कृ+क्त, १.१) | was made |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श्व | स्त | स्याः | प्रि | य | मा | प्तु | सु | द्धु | र | धि | यो | धा | राः | सृ | ज | न्त्या | र | या |
| न्न | म्रो | न्न | म्र | क | पो | ल | पा | लि | पु | ल | कै | र्वे | त | स्व | ती | र | स्रु | णः |
| च | त्वा | रः | प्र | ह | राः | स्म | रा | र्ति | भि | र | भू | त्सा | पि | क्ष | पा | दुः | क्ष | या |
| त | त्त | स्यां | कृ | प | या | खि | लै | व | वि | धि | ना | रा | त्रि | स्त्रि | या | मा | कृ | ता |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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