सुरापराधस्तव वा कियानयं
स्वयंवरायामनुकम्प्रता मयि ।
गिरापि वक्ष्यन्ति मखेषु तर्पणाद्
इदं न देवा मुखलज्जयैव ते ॥
सुरापराधस्तव वा कियानयं
स्वयंवरायामनुकम्प्रता मयि ।
गिरापि वक्ष्यन्ति मखेषु तर्पणाद्
इदं न देवा मुखलज्जयैव ते ॥
स्वयंवरायामनुकम्प्रता मयि ।
गिरापि वक्ष्यन्ति मखेषु तर्पणाद्
इदं न देवा मुखलज्जयैव ते ॥
अन्वयः
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स्वयं-वरायाम् मयि अनुकम्प्रता (तव) अयं सुर-अपराधः वा कियान्? ते देवाः मखेषु तर्पणात् मुख-लज्जया एव इदं गिरा अपि न वक्ष्यन्ति ।
Summary
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'How great an offense against the gods could it be for you to show me compassion at my svayamvara? Since you satisfy them with offerings in sacrifices, those very gods, out of shame, will not say a single word about this.'
पदच्छेदः
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| सुरापराधः | सुर–अपराध (१.१) | offense against the gods |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| वा | वा | or |
| कियान् | कियत् (१.१) | how great |
| अयं | इदम् (१.१) | this |
| स्वयंवरायाम् | स्वयंवर (७.१) | in the svayamvara |
| अनुकम्प्रता | अनुकम्प्रता (१.१) | compassion |
| मयि | अस्मद् (७.१) | towards me |
| गिरा | गिर् (३.१) | with a word |
| अपि | अपि | even |
| वक्ष्यन्ति | वक्ष्यन्ति (√वच् कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | will say |
| मखेषु | मख (७.३) | in sacrifices |
| तर्पणात् | तर्पण (५.१) | due to being satisfied |
| इदं | इदम् (२.१) | this |
| न | न | not |
| देवाः | देव (१.३) | the gods |
| मुखलज्जया | मुख–लज्जा (३.१) | out of shame |
| एव | एव | only |
| ते | तद् (१.३) | those |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सु | रा | प | रा | ध | स्त | व | वा | कि | या | न | यं |
| स्व | यं | व | रा | या | म | नु | क | म्प्र | ता | म | यि |
| गि | रा | पि | व | क्ष्य | न्ति | म | खे | षु | त | र्प | णा |
| दि | दं | न | दे | वा | मु | ख | ल | ज्ज | यै | व | ते |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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