जितस्तवयास्येन विधुः स्मरः श्रिया
कृतप्रतिज्ञौ मम तौ वधे कुतः ।
तवेति कृत्वा यदि तज्जितं मया
न मोघसङ्कल्पधराः किलामराः ॥
जितस्तवयास्येन विधुः स्मरः श्रिया
कृतप्रतिज्ञौ मम तौ वधे कुतः ।
तवेति कृत्वा यदि तज्जितं मया
न मोघसङ्कल्पधराः किलामराः ॥
कृतप्रतिज्ञौ मम तौ वधे कुतः ।
तवेति कृत्वा यदि तज्जितं मया
न मोघसङ्कल्पधराः किलामराः ॥
अन्वयः
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त्वया आस्येन विधुः जितः, श्रिया स्मरः (जितः) । तौ मम वधे कृत-प्रतिज्ञौ (स्तः) । कुतः? यदि 'तत् तव' इति कृत्वा मया जितं, (तर्हि) अमराः मोघ-सङ्कल्प-धराः न किल?
Summary
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'You have conquered the moon with your face and the god of love with your beauty. Now, those two have vowed to kill me. Why? If I have defeated them simply by considering them yours (and thus inferior), are the gods not known for fulfilling their resolutions? They will surely kill me for this insult.'
पदच्छेदः
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| जितः | जित (√जि+क्त, १.१) | is conquered |
| त्वया | युष्मद् (३.१) | by you |
| आस्येन | आस्य (३.१) | by your face |
| विधुः | विधु (१.१) | the moon |
| स्मरः | स्मर (१.१) | Kama (the god of love) |
| श्रिया | श्री (३.१) | by your beauty |
| कृतप्रतिज्ञौ | कृत–प्रतिज्ञा (१.२) | have made a vow |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| तौ | तद् (१.२) | those two |
| वधे | वध (७.१) | in killing |
| कुतः | कुतः | why |
| तव | युष्मद् (६.१) | yours |
| इति | इति | thus |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ+क्त्वा) | having considered |
| यदि | यदि | if |
| तत् | तद् (२.१) | that |
| जितं | जित (√जि+क्त, १.१) | is conquered |
| मया | अस्मद् (३.१) | by me |
| न | न | not |
| मोघसङ्कल्पधराः | मोघ–सङ्कल्प–धर (१.३) | those whose resolutions are futile |
| किल | किल | indeed |
| अमराः | अमर (१.३) | the gods |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| जि | त | स्त | व | या | स्ये | न | वि | धुः | स्म | रः | श्रि | या |
| कृ | त | प्र | ति | ज्ञौ | म | म | तौ | व | धे | कु | तः | |
| त | वे | ति | कृ | त्वा | य | दि | त | ज्जि | तं | म | या | |
| न | मो | घ | स | ङ्क | ल्प | ध | राः | कि | ला | म | राः | |
| ज | त | ज | र | |||||||||
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