असंशयं स त्वयि हंस एव मां
शशंस न त्वद्विरहाप्तसंशयाम् ।
क्व चन्द्रवंशस्य वतंस मद्वधा-
न्नृशंसता संभविनी भवादृशे ॥
असंशयं स त्वयि हंस एव मां
शशंस न त्वद्विरहाप्तसंशयाम् ।
क्व चन्द्रवंशस्य वतंस मद्वधा-
न्नृशंसता संभविनी भवादृशे ॥
शशंस न त्वद्विरहाप्तसंशयाम् ।
क्व चन्द्रवंशस्य वतंस मद्वधा-
न्नृशंसता संभविनी भवादृशे ॥
अन्वयः
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चन्द्रवंशस्य वतंस ! सः हंसः त्वयि असंशयं (सतीम्) माम् एव शशंस, तु अद्विरह-आप्त-संशयाम् न । भवादृशे मत्-वधात् नृशंसता क्व संभविनी?
Summary
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(Damayanti says) 'O ornament of the lunar dynasty! That swan surely described me to you as being unwavering in my love, not as one whose life is endangered by our separation. How could the cruelty of killing me ever be possible in someone like you?'
पदच्छेदः
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| असंशयं | असंशयम् | without doubt |
| सः | तद् (१.१) | that |
| त्वयि | युष्मद् (७.१) | to you |
| हंसः | हंस (१.१) | swan |
| एव | एव | only |
| मां | अस्मद् (२.१) | me |
| शशंस | शशंस (√शंस कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | described |
| न | न | not |
| तु | तु | but |
| त्वद्विरहाप्तसंशयाम् | त्वद्–विरह–आप्त–संशया (२.१) | as one whose life is in doubt from separation from you |
| क्व | क्व | where |
| चन्द्रवंशस्य | चन्द्र–वंश (६.१) | of the lunar dynasty |
| वतंस | वतंस (८.१) | O ornament |
| मद्वधात् | मद्–वध (५.१) | from killing me |
| नृशंसता | नृशंसता (१.१) | cruelty |
| संभविनी | संभविन् (१.१) | is possible |
| भवादृशे | भवादृश (७.१) | in one like you |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | सं | श | यं | स | त्व | यि | हं | स | ए | व | मां |
| श | शं | स | न | त्व | द्वि | र | हा | प्त | सं | श | याम् |
| क्व | च | न्द्र | वं | श | स्य | व | तं | स | म | द्व | धा |
| न्नृ | शं | स | ता | सं | भ | वि | नी | भ | वा | दृ | शे |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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