यदापवार्यापि न दातुमुत्तरं
शशाक सख्याः श्रवसि प्रियस्व सा ।
विहस्य सख्येव तमव्रवीत्तदा
ह्रियाऽधुना मौनधना भवत्प्रिया ॥
यदापवार्यापि न दातुमुत्तरं
शशाक सख्याः श्रवसि प्रियस्व सा ।
विहस्य सख्येव तमव्रवीत्तदा
ह्रियाऽधुना मौनधना भवत्प्रिया ॥
शशाक सख्याः श्रवसि प्रियस्व सा ।
विहस्य सख्येव तमव्रवीत्तदा
ह्रियाऽधुना मौनधना भवत्प्रिया ॥
अन्वयः
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यदा सा प्रियस्य सख्याः श्रवसि अपवार्य अपि उत्तरं दातुम् न शशाक, तदा सखी एव विहस्य तम् अब्रवीत्, अधुना भवत्प्रिया ह्रिया मौनधना (अस्ति) ।
Summary
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When she (Damayanti) was unable to give an answer for her beloved even by whispering in her friend's ear, the friend herself smiled and told him, 'Right now, due to shyness, your beloved's only wealth is silence.'
पदच्छेदः
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| यदा | यदा | When |
| अपवार्य | अपवार्य (अप√वृ+णिच्+ल्यप्) | by concealing/whispering |
| अपि | अपि | even |
| न | न | not |
| दातुम् | दातुम् (√दा+तुमुन्) | to give |
| उत्तरं | उत्तर (२.१) | an answer |
| शशाक | शशाक (√शक् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was able |
| सख्याः | सखी (६.१) | of her friend |
| श्रवसि | श्रवस् (७.१) | in the ear |
| प्रियस्य | प्रिय (६.१) | of her beloved |
| सा | तद् (१.१) | she |
| विहस्य | विहस्य (वि√हस्+ल्यप्) | smiling |
| सखी | सखी (१.१) | the friend |
| एव | एव | herself |
| तम् | तद् (२.१) | to him |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | said |
| तदा | तदा | then |
| ह्रिया | ह्री (३.१) | due to shyness |
| अधुना | अधुना | now |
| मौनधना | मौन–धना (१.१) | whose wealth is silence |
| भवत्प्रिया | भवत्–प्रिया (१.१) | your beloved |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | दा | प | वा | र्या | पि | न | दा | तु | मु | त्त | रं |
| श | शा | क | स | ख्याः | श्र | व | सि | प्रि | य | स्व | सा |
| वि | ह | स्य | स | ख्ये | व | त | म | व्र | वी | त्त | दा |
| ह्रि | या | ऽधु | ना | मौ | न | ध | ना | भ | व | त्प्रि | या |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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