मनोभुवस्ते भविनां मनः पिता
निमज्जयन्नेनसि तन्न लज्जसे ।
अमुद्रि सत्पुत्रकथा त्वयेति सा
स्थिता सती मन्मथनिन्दिनी धिया ॥
मनोभुवस्ते भविनां मनः पिता
निमज्जयन्नेनसि तन्न लज्जसे ।
अमुद्रि सत्पुत्रकथा त्वयेति सा
स्थिता सती मन्मथनिन्दिनी धिया ॥
निमज्जयन्नेनसि तन्न लज्जसे ।
अमुद्रि सत्पुत्रकथा त्वयेति सा
स्थिता सती मन्मथनिन्दिनी धिया ॥
अन्वयः
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(हे) मनोभुवः! ते भविनाम् मनः पिता (असि)। (त्वम्) एनसि (मनः) निमज्जयन् तत् न लज्जसे? त्वया सत्-पुत्र-कथा अमुद्रि। इति सा सती धिया मन्मथ-निन्दिनी स्थिता।
Summary
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Damayanti mentally reproached the god of love: "O Kama, you are the father of mortals' minds! Are you not ashamed of plunging them into sin? You have put an end to the very idea of being a 'good son' (by your own misconduct)." Thus the chaste lady stood, silently censuring Kama.
पदच्छेदः
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| मनोभुवः | मनोभुव (८.१) | O Kama! |
| ते | युष्मद् (१.१) | You, |
| भविनाम् | भविन् (६.३) | of mortals' |
| मनः | मनस् (२.१) | minds |
| पिता | पितृ (१.१) | the father, |
| निमज्जयन् | निमज्जयत् (√मस्ज्+णिच्+शतृ, १.१) | plunging (them) |
| एनसि | एनस् (७.१) | in sin, |
| तत् | तद् | therefore |
| न | न | not |
| लज्जसे | लज्जसे (√लज्ज् कर्तरि लट् (आत्मने.) म.पु. द्वि.) | you feel ashamed? |
| अमुद्रि | अमुद्रि (√मुद्र् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | Has been sealed |
| सत्पुत्रकथा | सत्–पुत्र–कथा (१.१) | the story of being a good son |
| त्वया | युष्मद् (३.१) | by you. |
| इति | इति | Thus |
| सा | तद् (१.१) | she |
| स्थिता | स्थित (√स्था+क्त, १.१) | stood, |
| सती | सती (१.१) | a chaste woman, |
| मन्मथनिन्दिनी | मन्मथ–निन्दिनी (१.१) | reproaching Kama |
| धिया | धी (३.१) | with her mind. |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | नो | भु | व | स्ते | भ | वि | नां | म | नः | पि | ता |
| नि | म | ज्ज | य | न्ने | न | सि | त | न्न | ल | ज्ज | से |
| अ | मु | द्रि | स | त्पु | त्र | क | था | त्व | ये | ति | सा |
| स्थि | ता | स | ती | म | न्म | थ | नि | न्दि | नी | धि | या |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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