मम श्रमश्चेतनयानया फली
बलीयसालोपि च सैव वेधसा ।
न वस्तु दैवस्वरसाद्विनाश्वरं
सुरेश्वरोऽपि प्रतिकर्तुमीश्वरः ॥
मम श्रमश्चेतनयानया फली
बलीयसालोपि च सैव वेधसा ।
न वस्तु दैवस्वरसाद्विनाश्वरं
सुरेश्वरोऽपि प्रतिकर्तुमीश्वरः ॥
बलीयसालोपि च सैव वेधसा ।
न वस्तु दैवस्वरसाद्विनाश्वरं
सुरेश्वरोऽपि प्रतिकर्तुमीश्वरः ॥
अन्वयः
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अनया चेतनया मम श्रमः फली (अभूत्)। च बलीयसा वेधसा सा एव (चेतना) आलोपि। दैव-स्व-रसात् विनाश्वरम् वस्तु प्रतिकर्तुम् सुर-ईश्वरः अपि न ईश्वरः (अस्ति)।
Summary
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"My effort became fruitful through this delirium," Nala muses, "but that very success was snatched away by a more powerful Fate. Even Indra, the lord of gods, is incapable of altering anything that is destined to perish by the will of Fate."
पदच्छेदः
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| मम | अस्मद् (६.१) | My |
| श्रमः | श्रम (१.१) | effort |
| चेतनया | चेतना (३.१) | by consciousness |
| अनया | इदम् (३.१) | this |
| फली | फलिन् (१.१) | became fruitful, |
| बलीयसा | बलीयस् (३.१) | by the more powerful |
| आलोपि | आलोपि (आ√लुप् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was destroyed |
| च | च | and |
| सा | तद् (१.१) | that |
| एव | एव | very thing |
| वेधसा | वेधस् (३.१) | by Fate. |
| न | न | not |
| वस्तु | वस्तु (२.१) | a thing |
| दैवस्वरसात् | दैव–स्वरस (५.१) | by the will of Fate |
| विनाश्वरम् | विनाश्वर (२.१) | perishable |
| सुरेश्वरः | सुर–ईश्वर (१.१) | the lord of the gods |
| अपि | अपि | even |
| प्रतिकर्तुम् | प्रतिकर्तुम् (प्रति√कृ+तुमुन्) | to remedy |
| ईश्वरः | ईश्वर (१.१) | is capable. |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | म | श्र | म | श्चे | त | न | या | न | या | फ | ली |
| ब | ली | य | सा | लो | पि | च | सै | व | वे | ध | सा |
| न | व | स्तु | दै | व | स्व | र | सा | द्वि | ना | श्व | रं |
| सु | रे | श्व | रो | ऽपि | प्र | ति | क | र्तु | मी | श्व | रः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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