धियात्मनस्तावदचारु नाचरं
परस्तु तद्वेद स यद्वदिष्यति ।
जनावनायोद्यमिनं जनार्दनं
क्षये जगज्जीवपिबं शिवं वदन् ॥
धियात्मनस्तावदचारु नाचरं
परस्तु तद्वेद स यद्वदिष्यति ।
जनावनायोद्यमिनं जनार्दनं
क्षये जगज्जीवपिबं शिवं वदन् ॥
परस्तु तद्वेद स यद्वदिष्यति ।
जनावनायोद्यमिनं जनार्दनं
क्षये जगज्जीवपिबं शिवं वदन् ॥
अन्वयः
AI
तावत् आत्मनः धिया अचारु न आचरम्। परः तु तत् वेद, सः यत् वदिष्यति (तत् वदिष्यति)। (इदम् तादृशम् यथा) जनावनाय उद्यमिनम् जनार्दनम् क्षये जगत्-जीव-पिबम् शिवम् वदन् (कश्चित् स्यात्)।
Summary
AI
"For my part, I did not intentionally act improperly," Nala thinks. "But Indra knows the truth and will say what he will. My situation is like calling Janardana (Vishnu), the protector of people, by the name of Shiva, the destroyer of worlds—my good intentions may be perceived as destructive betrayal."
पदच्छेदः
AI
| धिया | धी (३.१) | Intentionally, |
| आत्मनः | आत्मन् (६.१) | of my own, |
| तावत् | तावत् | for my part, |
| अचारु | अचारु (२.१) | anything improper |
| न | न | not |
| आचरम् | आचरम् (आ√चर् कर्तरि लुङ् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I did. |
| परः | पर (१.१) | The other (Indra) |
| तु | तु | but |
| तत् | तद् (२.१) | that |
| वेद | वेद (√विद् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | knows; |
| सः | तद् (१.१) | he |
| यत् | यद् (२.१) | whatever |
| वदिष्यति | वदिष्यति (√वद् कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | will say. |
| जनावनाय | जन–अवन (४.१) | for the protection of people |
| उद्यमिनम् | उद्यमिन् (२.१) | the striving one, |
| जनार्दनम् | जनार्दन (२.१) | Janardana (Vishnu), |
| क्षये | क्षय (७.१) | at the time of destruction |
| जगज्जीवपिबम् | जगत्–जीव–पिब (२.१) | the one who drinks the life of the world, |
| शिवम् | शिव (२.१) | Shiva, |
| वदन् | वदत् (√वद्+शतृ, १.१) | calling. |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| धि | या | त्म | न | स्ता | व | द | चा | रु | ना | च | रं |
| प | र | स्तु | त | द्वे | द | स | य | द्व | दि | ष्य | ति |
| ज | ना | व | ना | यो | द्य | मि | नं | ज | ना | र्द | नं |
| क्ष | ये | ज | ग | ज्जी | व | पि | बं | शि | वं | व | दन् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.