न वर्तसे मन्मथनाटिका कथं
प्रकाशरोमावलिसूत्रधारिणी ।
तवाङ्गहारे रुचिमेति नायकः
शिखामणिश्च द्विजराड्विदूषकः ॥
न वर्तसे मन्मथनाटिका कथं
प्रकाशरोमावलिसूत्रधारिणी ।
तवाङ्गहारे रुचिमेति नायकः
शिखामणिश्च द्विजराड्विदूषकः ॥
प्रकाशरोमावलिसूत्रधारिणी ।
तवाङ्गहारे रुचिमेति नायकः
शिखामणिश्च द्विजराड्विदूषकः ॥
अन्वयः
AI
प्रकाशरोमावलिसूत्रधारिणी (त्वम्) कथम् मन्मथनाटिका न वर्तसे? तव अङ्गहारे नायकः रुचिम् एति, शिखामणिः च द्विजराट् विदूषकः (रुचिम् एति) ।
Summary
AI
"Why do you not act as the drama of love, you who bear the visible line of body hair as the stage manager's thread? In your graceful movements, the hero (your pearl necklace) takes delight, and the moon (king of the twice-born), your crest-jewel, acts as the jester."
पदच्छेदः
AI
| न | न | not |
| वर्तसे | वर्तसे (√वृत् कर्तरि लट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | you act as |
| मन्मथनाटिका | मन्मथ–नाटिका (१.१) | the drama of love |
| कथम् | कथम् | why |
| प्रकाशरोमावलिसूत्रधारिणी | प्रकाश–रोम–अवलि–सूत्रधारिणी (१.१) | you who bear the visible line of body hair as the stage manager's thread |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| अङ्गहारे | अङ्गहार (७.१) | in the graceful movement of limbs |
| रुचिम् | रुचि (२.१) | delight |
| एति | एति (√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | takes |
| नायकः | नायक (१.१) | the hero (pearl necklace) |
| शिखामणिः | शिखामणि (१.१) | the crest-jewel |
| च | च | and |
| द्विजराट् | द्विज–राज् (१.१) | the moon (king of the twice-born) |
| विदूषकः | विदूषक (१.१) | the jester |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | व | र्त | से | म | न्म | थ | ना | टि | का | क | थं |
| प्र | का | श | रो | मा | व | लि | सू | त्र | धा | रि | णी |
| त | वा | ङ्ग | हा | रे | रु | चि | मे | ति | ना | य | कः |
| शि | खा | म | णि | श्च | द्वि | ज | रा | ड्वि | दू | ष | कः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.