परिष्वजस्वानवकाशबाणता
स्मरस्य लग्ने हृदयेद्वयेऽस्तु नौ ।
दृढा मम त्वत्कुचयोः कठोरयोः
उरस्तटीयं परिचारिकोचिता ॥
परिष्वजस्वानवकाशबाणता
स्मरस्य लग्ने हृदयेद्वयेऽस्तु नौ ।
दृढा मम त्वत्कुचयोः कठोरयोः
उरस्तटीयं परिचारिकोचिता ॥
स्मरस्य लग्ने हृदयेद्वयेऽस्तु नौ ।
दृढा मम त्वत्कुचयोः कठोरयोः
उरस्तटीयं परिचारिकोचिता ॥
अन्वयः
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परिष्वजस्व । नौ हृदयद्वये लग्ने (सति) स्मरस्य अनवकाशबाणता अस्तु । इयम् मम दृढा उरस्तटी कठोरयोः त्वत्कुचयोः परिचारिकोचिता (अस्ति) ।
Summary
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"Embrace me! When our two hearts are joined, let there be no room for Kama's arrows. This firm expanse of my chest is a fitting handmaiden for your hard breasts."
पदच्छेदः
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| परिष्वजस्व | परिष्वजस्व (परि√स्वञ्ज् कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | embrace me |
| अनवकाशबाणता | अनवकाश–बाणता (१.१) | the state of having no room for arrows |
| स्मरस्य | स्मर (६.१) | of Kama |
| लग्ने | लग्न (√लग्+क्त, ७.२) | when joined |
| हृदयद्वये | हृदय–द्वय (७.२) | the pair of hearts |
| अस्तु | अस्तु (√अस् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let there be |
| नौ | अस्मद् (६.२) | of us two |
| दृढा | दृढ (१.१) | firm |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| त्वत्कुचयोः | त्वद्–कुच (७.२) | for your two breasts |
| कठोरयोः | कठोर (७.२) | hard |
| उरस्तटी | उरस्–तटी (१.१) | expanse of the chest |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| परिचारिकोचिता | परिचारिका–उचित (१.१) | a fitting handmaiden |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | रि | ष्व | ज | स्वा | न | व | का | श | बा | ण | ता |
| स्म | र | स्य | ल | ग्ने | हृ | द | ये | द्व | ये | ऽस्तु | नौ |
| दृ | ढा | म | म | त्व | त्कु | च | योः | क | ठो | र | योः |
| उ | र | स्त | टी | यं | प | रि | चा | रि | को | चि | ता |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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