समापय प्रावृषमश्रुविप्रुषां
स्मितेन विश्राणय कौमुदीमुदः ।
दृशावितः खेलतु खञ्जनद्वयी
विकासिपङ्केरुहमस्तु ते मुखम् ॥
समापय प्रावृषमश्रुविप्रुषां
स्मितेन विश्राणय कौमुदीमुदः ।
दृशावितः खेलतु खञ्जनद्वयी
विकासिपङ्केरुहमस्तु ते मुखम् ॥
स्मितेन विश्राणय कौमुदीमुदः ।
दृशावितः खेलतु खञ्जनद्वयी
विकासिपङ्केरुहमस्तु ते मुखम् ॥
अन्वयः
AI
अश्रुविप्रुषाम् प्रावृषम् समापय । स्मितेन कौमुदीमुदः विश्राणय । इतः दृशौ खञ्जनद्वयी खेलतु । ते मुखम् विकासिपङ्केरुहम् अस्तु ।
Summary
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"End this rainy season of teardrops. With your smile, bestow the joys of a moonlit night. Let a pair of wagtail birds play in your eyes. Let your face be a blooming lotus."
पदच्छेदः
AI
| समापय | समापय (सम्√आप् +णिच् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | end |
| प्रावृषम् | प्रावृष् (२.१) | the rainy season |
| अश्रुविप्रुषाम् | अश्रु–विप्रुष् (६.३) | of teardrops |
| स्मितेन | स्मित (३.१) | with your smile |
| विश्राणय | विश्राणय (वि√श्रण् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | bestow |
| कौमुदीमुदः | कौमुदी–मुद् (२.३) | the joys of a moonlit night |
| दृशौ | दृश् (१.२) | your two eyes |
| इतः | इतः | here |
| खेलतु | खेलतु (√खेल् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let it play |
| खञ्जनद्वयी | खञ्जन–द्वयी (१.१) | a pair of wagtails |
| विकासिपङ्केरुहम् | विकासिन्–पङ्केरुह (१.१) | a blooming lotus |
| अस्तु | अस्तु (√अस् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let it be |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| मुखम् | मुख (१.१) | face |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | मा | प | य | प्रा | वृ | ष | म | श्रु | वि | प्रु | षां |
| स्मि | ते | न | वि | श्रा | ण | य | कौ | मु | दी | मु | दः |
| दृ | शा | वि | तः | खे | ल | तु | ख | ञ्ज | न | द्व | यी |
| वि | का | सि | प | ङ्के | रु | ह | म | स्तु | ते | मु | खम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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