ममादरीदं विदरीतुमान्तरं
तदर्थिकल्पद्रुम किंचिदर्थये ।
भिदां हृदि द्वारमवाप्य मा स मे
हतासुभिः प्राणसमः समं गमः ॥
ममादरीदं विदरीतुमान्तरं
तदर्थिकल्पद्रुम किंचिदर्थये ।
भिदां हृदि द्वारमवाप्य मा स मे
हतासुभिः प्राणसमः समं गमः ॥
तदर्थिकल्पद्रुम किंचिदर्थये ।
भिदां हृदि द्वारमवाप्य मा स मे
हतासुभिः प्राणसमः समं गमः ॥
अन्वयः
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अर्थिकल्पद्रुम ! तत् इदम् मम आन्तरम् अदरीदम् विदरीतुम् (अस्ति) । (अहम्) किंचित् अर्थये । सः प्राणसमः मे हृदि द्वारम् अवाप्य भिदाम् हतासुभिः समम् मा गमः ।
Summary
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(Nala imagines Damayanti saying:) "O wish-fulfilling tree for supplicants, I ask for something to split this internal chasm of sorrow. Let that love, dear as life itself, having found an entry into my heart and created a breach, not depart along with my departed life-breaths."
पदच्छेदः
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| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| अदरीदम् | अदरीद (२.१) | this great chasm |
| विदरीतुम् | विदरीतुम् (वि√दृ+तुमुन्) | to split |
| आन्तरम् | आन्तर (२.१) | internal |
| तत् | तद् | therefore |
| अर्थिकल्पद्रुम | अर्थिन्–कल्पद्रुम (८.१) | O wish-fulfilling tree for supplicants |
| किंचित् | किंचित् | something |
| अर्थये | अर्थये (√अर्थ् कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I request |
| भिदाम् | भिदा (२.१) | a breach |
| हृदि | हृद् (७.१) | in the heart |
| द्वारम् | द्वार (२.१) | an entrance |
| अवाप्य | अवाप्य (अव√आप्+ल्यप्) | having obtained |
| मा | मा | do not |
| सः | तद् (१.१) | he (love) |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| हतासुभिः | हत (√हन्+क्त)–असु (३.३) | with the departed life-breaths |
| प्राणसमः | प्राण–सम (१.१) | equal to life |
| समम् | समम् | along with |
| गमः | गमः (√गम् कर्तरि लुङ् (परस्मै.) म.पु. एक.) | go |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | मा | द | री | दं | वि | द | री | तु | मा | न्त | रं |
| त | द | र्थि | क | ल्प | द्रु | म | किं | चि | द | र्थ | ये |
| भि | दां | हृ | दि | द्वा | र | म | वा | प्य | मा | स | मे |
| ह | ता | सु | भिः | प्रा | ण | स | मः | स | मं | ग | मः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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