अस्माकमध्यासितमेतदन्तः
तावद्भवत्या हृदयं चिराय ।
बहिस्त्वयालंक्रियतामिदानीम्
उरो मुरं विद्विषतः श्रियेव ॥
अस्माकमध्यासितमेतदन्तः
तावद्भवत्या हृदयं चिराय ।
बहिस्त्वयालंक्रियतामिदानीम्
उरो मुरं विद्विषतः श्रियेव ॥
तावद्भवत्या हृदयं चिराय ।
बहिस्त्वयालंक्रियतामिदानीम्
उरो मुरं विद्विषतः श्रियेव ॥
अन्वयः
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तावत् चिराय भवत्या एतत् हृदयम् अन्तः अध्यासिनम् । इदानीम् मुरम् विद्विषतः उरः श्रिया इव (अस्माकम् उरः) त्वया बहिः अलंक्रियताम् ।
Summary
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For a long time now, this heart of ours has been occupied within by you. Now, let our chest be adorned by you externally, just as the chest of Vishnu (the enemy of the demon Mura) is adorned by the goddess Lakshmi.
पदच्छेदः
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| अस्माकम् | अस्मद् (६.३) | our |
| अध्यासितम् | अध्यासित (अधि√आस्+क्त, १.१) | occupied |
| एतत् | एतद् (१.१) | this |
| अन्तः | अन्तर् | within |
| तावत् | तावत् | for so long |
| भवत्या | भवत् (३.१) | by you |
| हृदयम् | हृदय (१.१) | heart |
| चिराय | चिराय | for a long time |
| बहिः | बहिर् | externally |
| त्वया | युष्मद् (३.१) | by you |
| अलंक्रियताम् | अलंक्रियताम् (अलम्√कृ +यक् भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | let be adorned |
| इदानीम् | इदानीम् | now |
| उरः | उरस् (१.१) | the chest |
| मुरम् | मुर (२.१) | Mura |
| विद्विषतः | विद्विषत् (√द्विष्+क्वसु, ६.१) | of the enemy of |
| श्रिया | श्री (३.१) | by Shri (Lakshmi) |
| इव | इव | like |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | स्मा | क | म | ध्या | सि | त | मे | त | द | न्तः |
| ता | व | द्भ | व | त्या | हृ | द | यं | चि | रा | य |
| ब | हि | स्त्व | या | लं | क्रि | य | ता | मि | दा | नी |
| मु | रो | मु | रं | वि | द्वि | ष | तः | श्रि | ये | व |
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