प्रिया मनोभूशरदावदाहे
देवीस्त्वदर्थेन निमज्जयद्भिः ।
सुरेषु सारैः क्रियतेऽधुना तैः
पादार्पणानुग्रहभूरियं भूः ॥
प्रिया मनोभूशरदावदाहे
देवीस्त्वदर्थेन निमज्जयद्भिः ।
सुरेषु सारैः क्रियतेऽधुना तैः
पादार्पणानुग्रहभूरियं भूः ॥
देवीस्त्वदर्थेन निमज्जयद्भिः ।
सुरेषु सारैः क्रियतेऽधुना तैः
पादार्पणानुग्रहभूरियं भूः ॥
अन्वयः
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अधुना त्वत्-अर्थेन मनोभू-शर-दाव-दाहे प्रियाः देवीः निमज्जयद्भिः, सुरेषु सारैः तैः इयम् भूः पाद-अर्पण-अनुग्रह-भूः क्रियते ।
Summary
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Now, by those best among the gods, who for your sake are plunging their beloved goddesses into the burning forest fire of Kama's arrows, this earth is being made a place favored by the touch of their feet.
पदच्छेदः
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| प्रियाः | प्रिया (२.३) | beloved |
| मनोभूशरदावदाहे | मनोभू–शर–दाव–दाह (७.१) | in the burning forest fire of Kama's arrows |
| देवीः | देवी (२.३) | goddesses |
| त्वदर्थेन | त्वद्–अर्थ (३.१) | for your sake |
| निमज्जयद्भिः | निमज्जयत् (नि√मस्ज्+णिच्+शतृ, ३.३) | by those who are plunging |
| सुरेषु | सुर (७.३) | among the gods |
| सारैः | सार (३.३) | by the best |
| क्रियते | क्रियते (√कृ भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is being made |
| अधुना | अधुना | now |
| तैः | तद् (३.३) | by them |
| पादार्पणानुग्रहभूः | पाद–अर्पण–अनुग्रह–भू (१.१) | a place favored by the touch of their feet |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| भूः | भू (१.१) | earth |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रि | या | म | नो | भू | श | र | दा | व | दा | हे |
| दे | वी | स्त्व | द | र्थे | न | नि | म | ज्ज | य | द्भिः |
| सु | रे | षु | सा | रैः | क्रि | य | ते | ऽधु | ना | तैः |
| पा | दा | र्प | णा | नु | ग्र | ह | भू | रि | यं | भूः |
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