यत्प्रत्युत त्वन्मृदुबाहुवल्ली-
स्मृतिस्रजं गुम्फति दुर्विनीता ।
ततो विधत्तेऽधिकमेव तापं
तेन श्रिता शैत्यगुणा मृणाली ॥
यत्प्रत्युत त्वन्मृदुबाहुवल्ली-
स्मृतिस्रजं गुम्फति दुर्विनीता ।
ततो विधत्तेऽधिकमेव तापं
तेन श्रिता शैत्यगुणा मृणाली ॥
स्मृतिस्रजं गुम्फति दुर्विनीता ।
ततो विधत्तेऽधिकमेव तापं
तेन श्रिता शैत्यगुणा मृणाली ॥
अन्वयः
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यत् दुर्विनीता (स्मृतिः) प्रत्युत त्वत्-मृदु-बाहु-वल्ली-स्मृति-स्रजम् गुम्फति, ततः तेन श्रिता शैत्य-गुणा मृणाली अधिकम् एव तापम् विधत्ते ।
Summary
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Because his unruly memory, on the contrary, weaves a garland of remembrance of your soft creeper-like arms, the lotus stalk he wears, despite its cooling properties, therefore causes him even more heat.
पदच्छेदः
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| यत् | यत् | because |
| प्रत्युत | प्रत्युत | on the contrary |
| त्वन्मृदुबाहुवल्लीस्मृतिस्रजम् | त्वद्–मृदु–बाहु–वल्ली–स्मृति–स्रज् (२.१) | a garland of the memory of your soft creeper-like arms |
| गुम्फति | गुम्फति (√गुम्फ् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | weaves |
| दुर्विनीता | दुर्विनीत (१.१) | unruly (memory) |
| ततः | ततस् | therefore |
| विधत्ते | विधत्ते (वि√धा कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | causes |
| अधिकम् | अधिक (२.१) | more |
| एव | एव | even |
| तापम् | ताप (२.१) | heat |
| तेन | तद् (३.१) | by him |
| श्रिता | श्रित (√श्रि+क्त, १.१) | worn |
| शैत्यगुणा | शैत्य–गुण (१.१) | possessing cooling properties |
| मृणाली | मृणाली (१.१) | the lotus stalk |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | त्प्र | त्यु | त | त्व | न्मृ | दु | बा | हु | व | ल्ली |
| स्मृ | ति | स्र | जं | गु | म्फ | ति | दु | र्वि | नी | ता |
| त | तो | वि | ध | त्ते | ऽधि | क | मे | व | ता | पं |
| ते | न | श्रि | ता | शै | त्य | गु | णा | मृ | णा | ली |
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