पुत्री सुहृद्येन सरोरुहाणां
यत्प्रेयसी चन्दनवासिता दिक् ।
धैर्यं विभुः सोऽपि तवैव हेतोः
स्मरप्रतापज्वलने जुहाव ॥
पुत्री सुहृद्येन सरोरुहाणां
यत्प्रेयसी चन्दनवासिता दिक् ।
धैर्यं विभुः सोऽपि तवैव हेतोः
स्मरप्रतापज्वलने जुहाव ॥
यत्प्रेयसी चन्दनवासिता दिक् ।
धैर्यं विभुः सोऽपि तवैव हेतोः
स्मरप्रतापज्वलने जुहाव ॥
अन्वयः
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येन सरोरुहाणाम् पुत्री सुहृत्, यत्-प्रेयसी चन्दन-वासिता दिक् (अस्ति), सः विभुः अपि तव एव हेतोः धैर्यम् स्मर-प्रताप-ज्वलने जुहाव ।
Summary
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He (the Moon), whose daughter Lakshmi is a friend to lotuses and whose beloved is the sandalwood-scented night, even that powerful one has sacrificed his composure in the fire of Kama's prowess solely for your sake.
पदच्छेदः
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| पुत्री | पुत्री (१.१) | daughter (Lakshmi) |
| सुहृत् | सुहृद् (१.१) | is a friend |
| येन | यद् (३.१) | by whom |
| सरोरुहाणाम् | सरोरुह (६.३) | of lotuses |
| यत्प्रेयसी | यद्–प्रेयसी (१.१) | whose beloved |
| चन्दनवासिता | चन्दन–वासित (१.१) | is sandalwood-scented |
| दिक् | दिश् (१.१) | the direction (night) |
| धैर्यम् | धैर्य (२.१) | composure |
| विभुः | विभु (१.१) | the powerful one |
| सः | तद् (१.१) | he (the Moon) |
| अपि | अपि | even |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| एव | एव | only |
| हेतोः | हेतु (५.१) | for the sake of |
| स्मरप्रतापज्वलने | स्मर–प्रताप–ज्वलन (७.१) | in the fire of Kama's prowess |
| जुहाव | जुहाव (√हु कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | sacrificed |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पु | त्री | सु | हृ | द्ये | न | स | रो | रु | हा | णां |
| य | त्प्रे | य | सी | च | न्द | न | वा | सि | ता | दिक् |
| धै | र्यं | वि | भुः | सो | ऽपि | त | वै | व | हे | तोः |
| स्म | र | प्र | ता | प | ज्व | ल | ने | जु | हा | व |
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