दमस्वसः सेयमुपैति तृष्णा
हरेर्जगत्यग्रिमलेख्यलक्ष्मीम् ।
दृशां यदब्धिस्तव नाम दृष्टि-
त्रिभागलोभार्तिमसौ बिभर्ति ॥
दमस्वसः सेयमुपैति तृष्णा
हरेर्जगत्यग्रिमलेख्यलक्ष्मीम् ।
दृशां यदब्धिस्तव नाम दृष्टि-
त्रिभागलोभार्तिमसौ बिभर्ति ॥
हरेर्जगत्यग्रिमलेख्यलक्ष्मीम् ।
दृशां यदब्धिस्तव नाम दृष्टि-
त्रिभागलोभार्तिमसौ बिभर्ति ॥
अन्वयः
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दमस्वसः! सा इयम् हरेः तृष्णा जगति अग्रिम-लेख्य-लक्ष्मीम् उपैति । यत् असौ अब्धिः नाम तव दृशाम् दृष्टि-त्रिभाग-लोभ-आर्तिम् बिभर्ति ।
Summary
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O sister of Dama (Damayanti)! This longing of Indra attains the foremost beauty to be recorded in the world. Because that ocean (Indra) indeed bears the pain of longing for even a fraction of a glance from your eyes.
पदच्छेदः
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| दमस्वसः | दमस्वसृ (८.१) | O sister of Dama |
| सा | तद् (१.१) | that |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| उपैति | उपैति (उप√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attains |
| तृष्णा | तृष्णा (१.१) | thirst |
| हरेः | हरि (६.१) | of Hari (Indra) |
| जगति | जगत् (७.१) | in the world |
| अग्रिमलेख्यलक्ष्मीम् | अग्रिम–लेख्य–लक्ष्मी (२.१) | the foremost beauty to be recorded |
| दृशाम् | दृश् (६.३) | of (your) eyes |
| यत् | यत् | because |
| अब्धिः | अब्धि (१.१) | the ocean (Indra) |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| नाम | नाम | indeed |
| दृष्टित्रिभागलोभार्तिम् | दृष्टि–त्रिभाग–लोभ–आर्ति (२.१) | the pain of longing for a three-part glance |
| असौ | अदस् (१.१) | he |
| बिभर्ति | बिभर्ति (√भृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | bears |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| द | म | स्व | सः | से | य | मु | पै | ति | तृ | ष्णा |
| ह | रे | र्ज | ग | त्य | ग्रि | म | ले | ख्य | ल | क्ष्मीम् |
| दृ | शां | य | द | ब्धि | स्त | व | ना | म | दृ | ष्टि |
| त्रि | भा | ग | लो | भा | र्ति | म | सौ | बि | भ | र्ति |
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||
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