शरैः प्रसूनैस्तुदतः स्मरस्य
स्मर्तुं स किं नाशनिना करोति ।
अभेद्यमस्याहह वर्म न स्यात्
अनङ्गता चेद्गिरिशप्रसादः ॥
शरैः प्रसूनैस्तुदतः स्मरस्य
स्मर्तुं स किं नाशनिना करोति ।
अभेद्यमस्याहह वर्म न स्यात्
अनङ्गता चेद्गिरिशप्रसादः ॥
स्मर्तुं स किं नाशनिना करोति ।
अभेद्यमस्याहह वर्म न स्यात्
अनङ्गता चेद्गिरिशप्रसादः ॥
अन्वयः
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सः (इन्द्रः) प्रसूनैः शरैः तुदतः स्मरस्य अशनिना स्मर्तुम् किम् न करोति? अहह, चेत् अनङ्गता गिरिश-प्रसादः (न स्यात्), (तर्हि) अस्य अभेद्यम् वर्म न स्यात् ।
Summary
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"Why does he (Indra) not retaliate with his thunderbolt against Kamadeva who torments him with flower-arrows? Alas, if his bodilessness were not a boon from Girisha (Shiva), it would not be an impenetrable armor for him."
पदच्छेदः
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| शरैः | शर (३.३) | with arrows |
| प्रसूनैः | प्रसून (३.३) | of flowers |
| तुदतः | तुदत् (√तुद्+शतृ, ६.१) | of the tormenting |
| स्मरस्य | स्मर (६.१) | Kamadeva |
| स्मर्तुं | स्मर्तुम् (√स्मृ+तुमुन्) | to retaliate |
| सः | तद् (१.१) | he (Indra) |
| किं | किम् | why |
| न | न | not |
| अशनिना | अशनि (३.१) | with the thunderbolt |
| करोति | करोति (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | does |
| अभेद्यम् | अभेद्य (१.१) | impenetrable |
| अस्य | इदम् (६.१) | his |
| अहह | अहह | alas |
| वर्म | वर्मन् (१.१) | armor |
| न | न | not |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | would be |
| अनङ्गता | अनङ्गता (१.१) | bodilessness |
| चेत् | चेत् | if |
| गिरिशप्रसादः | गिरिश–प्रसाद (१.१) | a boon from Girisha (Shiva) |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श | रैः | प्र | सू | नै | स्तु | द | तः | स्म | र | स्य |
| स्म | र्तुं | स | किं | ना | श | नि | ना | क | रो | ति |
| अ | भे | द्य | म | स्या | ह | ह | व | र्म | न | स्या |
| त | न | ङ्ग | ता | चे | द्गि | रि | श | प्र | सा | दः |
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