तेषामिदानीं किल केवलं सा
हृदि त्वदाशा विलसत्यजस्रम् ।
आशास्तु नासाद्य तनूरुदाराः
पूर्वादयः पूर्ववदात्मदाराः ॥
तेषामिदानीं किल केवलं सा
हृदि त्वदाशा विलसत्यजस्रम् ।
आशास्तु नासाद्य तनूरुदाराः
पूर्वादयः पूर्ववदात्मदाराः ॥
हृदि त्वदाशा विलसत्यजस्रम् ।
आशास्तु नासाद्य तनूरुदाराः
पूर्वादयः पूर्ववदात्मदाराः ॥
अन्वयः
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इदानीम् तेषाम् हृदि केवलम् सा त्वत्-आशा किल अजस्रम् विलसति । तु पूर्व-आदयः आशाः उदाराः तनूः न आसाद्य पूर्ववत् आत्म-दाराः (न सन्ति) ।
Summary
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"Now, indeed, only the hope for you constantly shines in their hearts. The eastern and other directions, however, not attaining their noble forms, are no longer their own beloveds as before."
पदच्छेदः
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| तेषाम् | तद् (६.३) | their |
| इदानीं | इदानीम् | Now |
| किल | किल | indeed |
| केवलं | केवलम् | only |
| सा | तद् (१.१) | that |
| हृदि | हृद् (७.१) | in the hearts |
| त्वदाशा | त्वद्–आशा (१.१) | hope for you |
| विलसति | विलसति (वि√लस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | shines |
| अजस्रम् | अजस्रम् | constantly |
| आशाः | आशा (१.३) | the directions |
| तु | तु | but |
| न | न | not |
| आसाद्य | आसाद्य (आ√सद्+ल्यप्) | attaining |
| तनूः | तनु (२.३) | bodies |
| उदाराः | उदार (१.३) | noble |
| पूर्वादयः | पूर्व–आदि (१.३) | the eastern and others |
| पूर्ववत् | पूर्ववत् | as before |
| आत्मदाराः | आत्मन्–दाराः (१.३) | their own beloveds |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ते | षा | मि | दा | नीं | कि | ल | के | व | लं | सा |
| हृ | दि | त्व | दा | शा | वि | ल | स | त्य | ज | स्रम् |
| आ | शा | स्तु | ना | सा | द्य | त | नू | रु | दा | राः |
| पू | र्वा | द | यः | पू | र्व | व | दा | त्म | दा | राः |
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