चरच्चिरं शैशवयौवनीय-
द्वैराज्यभाजि त्वयि खेदमेति ।
तेषां रुचश्चौरतरेण चित्तं
पञ्चेषुणा लुण्ठितधैर्यवित्तम् ॥
चरच्चिरं शैशवयौवनीय-
द्वैराज्यभाजि त्वयि खेदमेति ।
तेषां रुचश्चौरतरेण चित्तं
पञ्चेषुणा लुण्ठितधैर्यवित्तम् ॥
द्वैराज्यभाजि त्वयि खेदमेति ।
तेषां रुचश्चौरतरेण चित्तं
पञ्चेषुणा लुण्ठितधैर्यवित्तम् ॥
अन्वयः
AI
शैशव-यौवनीय-द्वैराज्य-भाजि त्वयि चिरम् चरति (सति), तेषाम् चित्तम् खेदम् एति । (किम्भूतं चित्तम्?) रुचः चौरतरेण पञ्चेषुणा लुण्ठित-धैर्य-वित्तम् ।
Summary
AI
"While you long experienced the dual reign of childhood and youth, their minds grew distressed. Their minds, whose wealth of fortitude was plundered by the five-arrowed god (Kamadeva), a thief greater than your beauty."
पदच्छेदः
AI
| चरत् | चरत् (√चर्+शतृ, १.१) | prevailing |
| चिरं | चिरम् | for a long time |
| शैशवयौवनीयद्वैराज्यभाजि | शैशव–यौवनीय–द्वैराज्य–भाजिन् (७.१) | in (you) possessing the dual reign of childhood and youth |
| त्वयि | युष्मद् (७.१) | in you |
| खेदम् | खेद (२.१) | distress |
| एति | एति (√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attains |
| तेषां | तद् (६.३) | their |
| रुचः | रुच् (६.१) | of beauty |
| चौरतरेण | चौरतर (३.१) | by the greater thief |
| चित्तं | चित्त (१.१) | mind |
| पञ्चेषुणा | पञ्चेषु (३.१) | by the five-arrowed one (Kamadeva) |
| लुण्ठितधैर्यवित्तम् | लुण्ठित (√लुण्ठ्+क्त)–धैर्य–वित्त (१.१) | whose wealth of fortitude was plundered |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| च | र | च्चि | रं | शै | श | व | यौ | व | नी | य |
| द्वै | रा | ज्य | भा | जि | त्व | यि | खे | द | मे | ति |
| ते | षां | रु | च | श्चौ | र | त | रे | ण | चि | त्तं |
| प | ञ्चे | षु | णा | लु | ण्ठि | त | धै | र्य | वि | त्तम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.