कौमारमारभ्य गणा गुणानां
हरन्ति ते दिक्षु धृताधिपत्यान् ।
सुराधिराजं सलिलाधिपं च
हुताशनं चार्यमनन्दनं च ॥
कौमारमारभ्य गणा गुणानां
हरन्ति ते दिक्षु धृताधिपत्यान् ।
सुराधिराजं सलिलाधिपं च
हुताशनं चार्यमनन्दनं च ॥
हरन्ति ते दिक्षु धृताधिपत्यान् ।
सुराधिराजं सलिलाधिपं च
हुताशनं चार्यमनन्दनं च ॥
अन्वयः
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ते गुणानाम् गणाः कौमारम् आरभ्य दिक्षु धृत-आधिपत्यान् सुर-अधिराजम् सलिल-अधिपम् च हुताशनम् च अर्यमनन्दनम् च हरन्ति ।
Summary
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"Starting from your girlhood, your multitudes of virtues have captivated those who hold sovereignty in the directions: the king of gods (Indra), the lord of waters (Varuna), the consumer of offerings (Agni), and the son of Aryaman (Yama)."
पदच्छेदः
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| कौमारम् | कौमार (२.१) | girlhood |
| आरभ्य | आरभ्य (आ√रभ्+ल्यप्) | starting from |
| गणाः | गण (१.३) | multitudes |
| गुणानां | गुण (६.३) | of virtues |
| हरन्ति | हरन्ति (√हृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | captivate |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| दिक्षु | दिश् (७.३) | in the directions |
| धृताधिपत्यान् | धृत–आधिपत्य (२.३) | those who hold sovereignty |
| सुराधिराजं | सुर–अधिराज (२.१) | the king of gods (Indra) |
| सलिलाधिपं | सलिल–अधिप (२.१) | the lord of waters (Varuna) |
| च | च | and |
| हुताशनं | हुत–अशन (२.१) | the consumer of offerings (Agni) |
| च | च | and |
| अर्यमनन्दनं | अर्यमन्–नन्दन (२.१) | the son of Aryaman (Yama) |
| च | च | and |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कौ | मा | र | मा | र | भ्य | ग | णा | गु | णा | नां |
| ह | र | न्ति | ते | दि | क्षु | धृ | ता | धि | प | त्यान् |
| सु | रा | धि | रा | जं | स | लि | ला | धि | पं | च |
| हु | ता | श | नं | चा | र्य | म | न | न्द | नं | च |
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