कल्याणि कल्यानि तवाङ्गकानि
कच्चित्तमां चित्तमनाविलं ते ।
अलं विलम्बेन गिरं मदीयाम्
आकर्णयाकर्णतटायताक्षि ॥
कल्याणि कल्यानि तवाङ्गकानि
कच्चित्तमां चित्तमनाविलं ते ।
अलं विलम्बेन गिरं मदीयाम्
आकर्णयाकर्णतटायताक्षि ॥
कच्चित्तमां चित्तमनाविलं ते ।
अलं विलम्बेन गिरं मदीयाम्
आकर्णयाकर्णतटायताक्षि ॥
अन्वयः
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कल्याणि ! आकर्ण-तट-आयताक्षि ! तव अङ्गकानि कल्यानि कच्चित्? ते चित्तम् तमाम् अनाविलम् कच्चित्? विलम्बेन अलम् । मदीयाम् गिरम् आकर्णय ।
Summary
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"O blessed one! O you whose eyes extend to the edges of your ears! I hope your limbs are well? I hope your mind is completely untroubled? Enough with the delay; listen to my words."
पदच्छेदः
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| कल्याणि | कल्याणी (८.१) | O blessed one! |
| कल्यानि | कल्याण (१.३) | well |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| अङ्गकानि | अङ्गक (१.३) | limbs |
| कच्चित् | कच्चित् | I hope |
| तमाम् | तमाम् | completely |
| चित्तम् | चित्त (१.१) | mind |
| अनाविलं | अनाविल (१.१) | untroubled |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| अलं | अलम् | Enough of |
| विलम्बेन | विलम्ब (३.१) | delay |
| गिरं | गिर् (२.१) | words |
| मदीयाम् | मदीय (२.१) | my |
| आकर्णय | आकर्णय (आ√कर्ण् +णिच् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | listen to |
| आकर्णतटायताक्षि | आकर्णतटायत–अक्षि (८.१) | O you whose eyes extend to the edges of your ears! |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | ल्या | णि | क | ल्या | नि | त | वा | ङ्ग | का | नि |
| क | च्चि | त्त | मां | चि | त्त | म | ना | वि | लं | ते |
| अ | लं | वि | ल | म्बे | न | गि | रं | म | दी | या |
| मा | क | र्ण | या | क | र्ण | त | टा | य | ता | क्षि |
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