हरित्पतीनां सदसः प्रतीहि
त्वदीयमेवातिथिमागतं माम् ।
वहन्तमन्तर्गुरुणादरेण
प्राणानिव स्वःप्रभुवाचिकानि ॥
हरित्पतीनां सदसः प्रतीहि
त्वदीयमेवातिथिमागतं माम् ।
वहन्तमन्तर्गुरुणादरेण
प्राणानिव स्वःप्रभुवाचिकानि ॥
त्वदीयमेवातिथिमागतं माम् ।
वहन्तमन्तर्गुरुणादरेण
प्राणानिव स्वःप्रभुवाचिकानि ॥
अन्वयः
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माम् हरित्-पतीनाम् सदसः आगतम् त्वदीयम् अतिथिम् एव प्रतीहि । (अहम्) अन्तः गुरुणा आदरेण स्वः-प्रभु-वाचिकानि प्राणान् इव वहन्तम् (अस्मि) ।
Summary
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"Know me to be your guest, having come from the assembly of the lords of the directions. I am carrying, with great respect within, the messages of the lord of heaven (Indra) as if they were my very life breaths."
पदच्छेदः
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| हरित्पतीनां | हरित्–पति (६.३) | of the lords of the directions |
| सदसः | सदस् (५.१) | from the assembly |
| प्रतीहि | प्रतीहि (प्रति√इ कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | know |
| त्वदीयम् | त्वदीय (२.१) | your |
| एव | एव | as |
| अतिथिम् | अतिथि (२.१) | guest |
| आगतं | आगत (आ√गम्+क्त, २.१) | having come |
| माम् | अस्मद् (२.१) | me |
| वहन्तम् | वहत् (√वह्+शतृ, २.१) | carrying |
| अन्तः | अन्तः | within |
| गुरुणा | गुरु (३.१) | with great |
| आदरेण | आदर (३.१) | respect |
| प्राणान् | प्राण (२.३) | life breaths |
| इव | इव | like |
| स्वःप्रभुवाचिकानि | स्वः–प्रभु–वाचिक (२.३) | the messages of the lord of heaven |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ह | रि | त्प | ती | नां | स | द | सः | प्र | ती | हि |
| त्व | दी | य | मे | वा | ति | थि | मा | ग | तं | माम् |
| व | ह | न्त | म | न्त | र्गु | रु | णा | द | रे | ण |
| प्रा | णा | नि | व | स्वः | प्र | भु | वा | चि | का | नि |
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