तस्मिन्नलोऽसाविति सान्वरज्य-
त्क्षणं क्षणं क्वेह स इत्युदास्त ।
पुनः स्म तस्यां वलतेऽस्य चित्तं
दूत्यादनेनाथ पुनर्न्यवर्ति ॥
तस्मिन्नलोऽसाविति सान्वरज्य-
त्क्षणं क्षणं क्वेह स इत्युदास्त ।
पुनः स्म तस्यां वलतेऽस्य चित्तं
दूत्यादनेनाथ पुनर्न्यवर्ति ॥
त्क्षणं क्षणं क्वेह स इत्युदास्त ।
पुनः स्म तस्यां वलतेऽस्य चित्तं
दूत्यादनेनाथ पुनर्न्यवर्ति ॥
अन्वयः
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सा 'असौ नलः' इति तस्मिन् क्षणं अन्वरज्यत्। क्षणं 'सः इह क्व?' इति उदास्त। पुनः अस्य चित्तं तस्यां वलते स्म। अथ अनेन दूत्यात् पुनः न्यवर्ति।
Summary
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For a moment, she (Damayanti) fell in love with him, thinking, "This is Nala." The next moment, she became indifferent, thinking, "Where is he (the real Nala)?" Then his (Nala's) mind turned towards her, but then, because of his duty as a messenger, it turned away again.
पदच्छेदः
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| तस्मिन् | तद् (७.१) | in him |
| नलोऽसौ | नलः–असौ | this is Nala |
| इति | इति | thus |
| सा | तद् (१.१) | she |
| अन्वरज्यत् | अन्वरज्यत् (अनु√रञ्ज् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | fell in love |
| क्षणं | क्षणम् (२.१) | for a moment |
| क्षणं | क्षणम् (२.१) | for a moment |
| क्वेह | क्व–इह | where here |
| सः | तद् (१.१) | he |
| इति | इति | thus |
| उदास्त | उदास्त (उद्√आस् कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | became indifferent |
| पुनः | पुनर् | again |
| स्म | स्म | (indicates past) |
| तस्यां | तद् (७.१) | towards her |
| वलते | वलते (√वल् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | turns |
| अस्य | इदम् (६.१) | his |
| चित्तं | चित्त (१.१) | mind |
| दूत्यादनेन | दूत्यात्–अनेन | because of this messenger duty |
| अथ | अथ | then |
| पुनः | पुनर् | again |
| न्यवर्ति | न्यवर्ति (नि√वृत् कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | turned back |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्मि | न्न | लो | ऽसा | वि | ति | सा | न्व | र | ज्य |
| त्क्ष | णं | क्ष | णं | क्वे | ह | स | इ | त्यु | दा | स्त |
| पु | नः | स्म | त | स्यां | व | ल | ते | ऽस्य | चि | त्तं |
| दू | त्या | द | ने | ना | थ | पु | न | र्न्य | व | र्ति |
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