कृत्वा दृशौ ते बहुवर्णचित्रे
किं कृष्णसारस्य तयोर्मृगस्य ।
अदूरजाग्रद्विदरप्रणाली-
रेखामयच्छद्विधिरर्धचन्द्रम् ॥
कृत्वा दृशौ ते बहुवर्णचित्रे
किं कृष्णसारस्य तयोर्मृगस्य ।
अदूरजाग्रद्विदरप्रणाली-
रेखामयच्छद्विधिरर्धचन्द्रम् ॥
किं कृष्णसारस्य तयोर्मृगस्य ।
अदूरजाग्रद्विदरप्रणाली-
रेखामयच्छद्विधिरर्धचन्द्रम् ॥
अन्वयः
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विधिः ते दृशौ बहु-वर्ण-चित्रे कृत्वा, तयोः अदूर-जाग्रत्-विदर-प्रणाली-रेखाम् (इव) अर्ध-चन्द्रम् (भ्रूरूपम्) कृष्णसारस्य मृगस्य (तव) किम् अयच्छत्?
Summary
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Having made your two eyes picturesque with many colors, did the Creator then give to you, a man like a blackbuck, the crescent moon (in the form of your eyebrow), which resembles the line of a freshly opened fissure near them?
पदच्छेदः
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| कृत्वा | कृत्वा (√कृ+क्त्वा) | having made |
| दृशौ | दृश् (२.२) | two eyes |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| बहुवर्णचित्रे | बहु–वर्ण–चित्र (२.२) | picturesque with many colors |
| किम् | किम् | (question particle) |
| कृष्णसारस्य | कृष्णसार (६.१) | of the blackbuck |
| तयोः | तद् (७.२) | near them |
| मृगस्य | मृग (६.१) | of the deer (you) |
| अदूरजाग्रद्विदरप्रणालीरेखाम् | अदूर–जाग्रत्–विदर–प्रणाली–रेखा (२.१) | the line of a freshly opened fissure nearby |
| अयच्छत् | अयच्छत् (√दा कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | did give |
| विधिः | विधि (१.१) | the Creator |
| अर्धचन्द्रम् | अर्धचन्द्र (२.१) | the crescent moon |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कृ | त्वा | दृ | शौ | ते | ब | हु | व | र्ण | चि | त्रे |
| किं | कृ | ष्ण | सा | र | स्य | त | यो | र्मृ | ग | स्य |
| अ | दू | र | जा | ग्र | द्वि | द | र | प्र | णा | ली |
| रे | खा | म | य | च्छ | द्वि | धि | र | र्ध | च | न्द्रम् |
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