भवत्पदाङ्गुष्ठमपि श्रिता श्रीः
ध्रुवं न लब्धा कुसुमायुधेन ।
रतीशजेतुः खलु चिह्नमस्मि-
न्नर्धेन्दुरास्ते नखवेषधारी ॥
भवत्पदाङ्गुष्ठमपि श्रिता श्रीः
ध्रुवं न लब्धा कुसुमायुधेन ।
रतीशजेतुः खलु चिह्नमस्मि-
न्नर्धेन्दुरास्ते नखवेषधारी ॥
ध्रुवं न लब्धा कुसुमायुधेन ।
रतीशजेतुः खलु चिह्नमस्मि-
न्नर्धेन्दुरास्ते नखवेषधारी ॥
अन्वयः
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भवत्-पद-अङ्गुष्ठम् अपि श्रिता श्रीः कुसुमायुधेन ध्रुवम् न लब्धा । खलु अस्मिन् रतीश-जेतुः (शिवस्य) चिह्नम् अर्ध-इन्दुः नख-वेष-धारी (सन्) आस्ते ।
Summary
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The beauty that resides even in your big toe was surely not attained by Kamadeva. Indeed, on it, the crescent moon, a symbol of Shiva (the conqueror of Kama), sits disguised as a toenail.
पदच्छेदः
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| भवत्पदाङ्गुष्ठम् | भवत्–पद–अङ्गुष्ठ (२.१) | your big toe |
| अपि | अपि | even |
| श्रिता | श्रित (√श्रि+क्त, १.१) | residing in |
| श्रीः | श्री (१.१) | the beauty |
| ध्रुवम् | ध्रुवम् | surely |
| न | न | not |
| लब्धा | लब्ध (√लभ्+क्त, १.१) | attained |
| कुसुमायुधेन | कुसुमायुध (३.१) | by Kamadeva |
| रतीशजेतुः | रतीश–जेतृ (६.१) | of the conqueror of Kama (Shiva) |
| खलु | खलु | indeed |
| चिह्नम् | चिह्न (१.१) | the symbol |
| अस्मिन् | इदम् (७.१) | on this |
| अर्धेन्दुः | अर्ध–इन्दु (१.१) | the crescent moon |
| आस्ते | आस्ते (√आस् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | sits |
| नखवेषधारी | नख–वेष–धारिन् (१.१) | disguised as a nail |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भ | व | त्प | दा | ङ्गु | ष्ठ | म | पि | श्रि | ता | श्रीः |
| ध्रु | वं | न | ल | ब्धा | कु | सु | मा | यु | धे | न |
| र | ती | श | जे | तुः | ख | लु | चि | ह्न | म | स्मि |
| न्न | र्धे | न्दु | रा | स्ते | न | ख | वे | ष | धा | री |
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