तीर्णः किमर्णोनिधिरेव नैष
सुरक्षितेऽभूदिह यत्प्रवेशः ।
फलं किमेतस्य तु साहसस्य
न तावदद्यापि विनिश्चिनोमि ॥
तीर्णः किमर्णोनिधिरेव नैष
सुरक्षितेऽभूदिह यत्प्रवेशः ।
फलं किमेतस्य तु साहसस्य
न तावदद्यापि विनिश्चिनोमि ॥
सुरक्षितेऽभूदिह यत्प्रवेशः ।
फलं किमेतस्य तु साहसस्य
न तावदद्यापि विनिश्चिनोमि ॥
अन्वयः
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किम् अर्णः-निधिः एव तीर्णः? यत् इह सु-रक्षिते (स्थले) एषः प्रवेशः अभूत् । तु एतस्य साहसस्य फलम् किम् (इति) अद्य अपि तावत् न वि-निश्चिनोमि ।
Summary
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Was the ocean itself crossed, that your entry here into this well-guarded place was possible? But what the purpose of this daring deed is, I cannot yet determine.
पदच्छेदः
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| तीर्णः | तीर्ण (√तॄ+क्त, १.१) | crossed |
| किम् | किम् | is it that |
| अर्णोनिधिरेव | अर्णोनिधि (१.१)–एव | the ocean itself |
| नैष | न–एषः (१.१) | this was not |
| सुरक्षिते | सुरक्षित (सु√रक्ष्+क्त, ७.१) | in a well-guarded (place) |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | happened |
| इह | इह | here |
| यत् | यत् | since |
| प्रवेशः | प्रवेश (१.१) | entry |
| फलम् | फल (१.१) | fruit |
| किम् | किम् (१.१) | what |
| एतस्य | एतद् (६.१) | of this |
| तु | तु | but |
| साहसस्य | साहस (६.१) | of the daring deed |
| न | न | not |
| तावत् | तावत् | yet |
| अद्यापि | अद्य–अपि | even now |
| विनिश्चिनोमि | विनिश्चिनोमि (वि+निस्√चि कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I ascertain |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ती | र्णः | कि | म | र्णो | नि | धि | रे | व | नै | ष |
| सु | र | क्षि | ते | ऽभू | दि | ह | य | त्प्र | वे | शः |
| फ | लं | कि | मे | त | स्य | तु | सा | ह | स | स्य |
| न | ता | व | द | द्या | पि | वि | नि | श्चि | नो | मि |
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