निवेद्यतां हन्त समापयन्तौ
शिरीषकोषभ्रदिमाभिमानम् ।
पादौ कियद्दूरमिमौ प्रयासे
निधित्सते तुच्छदयं मनस्ते ॥
निवेद्यतां हन्त समापयन्तौ
शिरीषकोषभ्रदिमाभिमानम् ।
पादौ कियद्दूरमिमौ प्रयासे
निधित्सते तुच्छदयं मनस्ते ॥
शिरीषकोषभ्रदिमाभिमानम् ।
पादौ कियद्दूरमिमौ प्रयासे
निधित्सते तुच्छदयं मनस्ते ॥
अन्वयः
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हन्त, शिरीष-कोष-भ्रदिम-अभिमानम् समापयन्तौ इमौ पादौ कियत्-दूरम् प्रयासे (स्थापयितुम्) ते तुच्छ-दयम् मनः निधित्सते? (तत्) निवेद्यताम् ।
Summary
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Alas, tell me, how far does your mind, so lacking in compassion, wish to put these two feet—which shame the softness of a Shirisha flower bud—through such exertion?
पदच्छेदः
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| निवेद्यताम् | निवेद्यताम् (नि√विद् +णिच्+यक् भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | let it be told |
| हन्त | हन्त | alas |
| समापयन्तौ | समापयत् (सम्√आप्+णिच्+शतृ, २.२) | which put an end to |
| शिरीषकोषभ्रदिमाभिमानम् | शिरीष–कोष–भ्रदिमन्–अभिमान (२.१) | the pride in softness of a Shirisha flower bud |
| पादौ | पाद (२.२) | two feet |
| कियद्दूरम् | कियद्दूरम् | how far |
| इमौ | इदम् (२.२) | these two |
| प्रयासे | प्रयास (७.१) | in exertion |
| निधित्सते | निधित्सते (नि√धा +सन्+उ कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | wishes to place |
| तुच्छदयम् | तुच्छदय (१.१) | having little compassion |
| मनः | मनस् (१.१) | mind |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | वे | द्य | तां | ह | न्त | स | मा | प | य | न्तौ |
| शि | री | ष | को | ष | भ्र | दि | मा | भि | मा | नम् |
| पा | दौ | कि | य | द्दू | र | मि | मौ | प्र | या | से |
| नि | धि | त्स | ते | तु | च्छ | द | यं | म | न | स्ते |
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