कियच्चिरं दैवतभाषितानि
निह्नोतुमेनं प्रभवन्तु नाम ।
पलालजालैः पिहितः स्वयं हि
प्रकाशमासादयतीक्षुडिम्भः ॥
कियच्चिरं दैवतभाषितानि
निह्नोतुमेनं प्रभवन्तु नाम ।
पलालजालैः पिहितः स्वयं हि
प्रकाशमासादयतीक्षुडिम्भः ॥
निह्नोतुमेनं प्रभवन्तु नाम ।
पलालजालैः पिहितः स्वयं हि
प्रकाशमासादयतीक्षुडिम्भः ॥
अन्वयः
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दैवत-भाषितानि एनं निह्नोतुं कियत्-चिरं नाम प्रभवन्तु? हि पलाल-जालैः पिहितः इक्षु-डिम्भः स्वयं प्रकाशम् आसादयति।
Summary
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For how long, indeed, can the words of the gods conceal him? For a young sugarcane stalk, though covered by a heap of straw, reveals its sweetness on its own.
पदच्छेदः
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| कियच्चिरं | कियत्–चिरम् | For how long |
| दैवतभाषितानि | दैवत–भाषित (१.३) | the words of the gods |
| निह्नोतुम् | निह्नोतुम् (नि√ह्नु+तुमुन्) | to conceal |
| एनं | एनद् (२.१) | him |
| प्रभवन्तु | प्रभवन्तु (प्र√भू कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | may they be able |
| नाम | नाम | indeed |
| पलालजालैः | पलाल–जाल (३.३) | by a heap of straw |
| पिहितः | पिहित (अपि√धा+क्त, १.१) | covered |
| स्वयं | स्वयम् | by itself |
| हि | हि | for |
| प्रकाशम् | प्रकाश (२.१) | light/manifestation |
| आसादयति | आसादयति (आ√सद् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attains |
| इक्षुडिम्भः | इक्षु–डिम्भ (१.१) | a young sugarcane stalk |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कि | य | च्चि | रं | दै | व | त | भा | षि | ता | नि |
| नि | ह्नो | तु | मे | नं | प्र | भ | व | न्तु | ना | म |
| प | ला | ल | जा | लैः | पि | हि | तः | स्व | यं | हि |
| प्र | का | श | मा | सा | द | य | ती | क्षु | डि | म्भः |
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