सुधासरःसु त्वदनङ्गतापः
शान्तो न नः किं पुरप्यसरःसु ।
निर्वाति तु त्वन्ममताक्षरेण
सूनाशुगेषोर्मधुसीकरेण ॥
सुधासरःसु त्वदनङ्गतापः
शान्तो न नः किं पुरप्यसरःसु ।
निर्वाति तु त्वन्ममताक्षरेण
सूनाशुगेषोर्मधुसीकरेण ॥
शान्तो न नः किं पुरप्यसरःसु ।
निर्वाति तु त्वन्ममताक्षरेण
सूनाशुगेषोर्मधुसीकरेण ॥
अन्वयः
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नः त्वत्-अनङ्ग-तापः सुधा-सरःसु (अपि) अप्सरःसु (अपि) पुरि अपि किम् न शान्तः? तु सून-आशुग-इषोः मधु-सीकरेण त्वत्-ममता-अक्षरेण (सः) निर्वाति ।
Summary
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Why is our love-sickness for you not calmed in lakes of nectar, among the celestial nymphs, or even in our city, heaven? But it is extinguished by the sweet spray from the flower-arrow of Cupid, which is the word 'mine' from you.
पदच्छेदः
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| सुधा | सुधा | of nectar |
| सरःसु | सरस् (७.३) | in the lakes |
| त्वत् | युष्मद् | for you |
| अनङ्ग | अनङ्ग | love's |
| तापः | ताप (१.१) | the fever |
| शान्तः | शान्त (√शम्+क्त, १.१) | is calmed |
| न | न | not |
| नः | अस्मद् (६.३) | our |
| किम् | किम् | why |
| पुरि | पुर् (७.१) | in the city (heaven) |
| अपि | अपि | even |
| अप्सरःसु | अप्सरस् (७.३) | among the celestial nymphs |
| निर्वाति | निर्वाति (निर्√वा कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is extinguished |
| तु | तु | but |
| त्वत् | युष्मद् | your |
| ममता | ममता | 'mine-ness' |
| अक्षरेण | अक्षर (३.१) | by the word |
| सून | सून | flower |
| आशुग | आशुग | arrow |
| इषोः | इषु (६.१) | of the arrow of him (Cupid) |
| मधु | मधु | sweet |
| सीकरेण | सीकर (३.१) | by the spray |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सु | धा | स | रः | सु | त्व | द | न | ङ्ग | ता | पः |
| शा | न्तो | न | नः | किं | पु | र | प्य | स | रः | सु |
| नि | र्वा | ति | तु | त्व | न्म | म | ता | क्ष | रे | ण |
| सू | ना | शु | गे | षो | र्म | धु | सी | क | रे | ण |
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