ऊरुप्रकाण्डद्वितयेन तन्व्याः
करः पराजीयत वारणीयः ।
युक्तं ह्रिया कुण्डलनच्छलेन
गोपायति स्वं मुखपुष्करं सः ॥
ऊरुप्रकाण्डद्वितयेन तन्व्याः
करः पराजीयत वारणीयः ।
युक्तं ह्रिया कुण्डलनच्छलेन
गोपायति स्वं मुखपुष्करं सः ॥
करः पराजीयत वारणीयः ।
युक्तं ह्रिया कुण्डलनच्छलेन
गोपायति स्वं मुखपुष्करं सः ॥
अन्वयः
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तन्व्याः ऊरुप्रकाण्डद्वितयेन वारणीयः करः पराजीयत । युक्तम्, सः ह्रिया कुण्डलनच्छलेन स्वम् मुखपुष्करम् गोपायति ।
Summary
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The elephant's trunk was defeated by the pair of stalk-like thighs of the slender lady. It is fitting that, out of shame, it now hides its own lotus-like face under the pretext of coiling itself.
पदच्छेदः
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| ऊरुप्रकाण्डद्वितयेन | ऊरु–प्रकाण्ड–द्वितय (३.१) | by the pair of stalk-like thighs |
| तन्व्याः | तन्वी (६.१) | of the slender lady |
| करः | कर (१.१) | the trunk |
| पराजीयत | पराजीयत (परा√जि भावकर्मणोः लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was defeated |
| वारणीयः | वारणीय (१.१) | of the elephant |
| युक्तम् | युक्त (१.१) | It is fitting |
| ह्रिया | ह्री (३.१) | out of shame |
| कुण्डलनच्छलेन | कुण्डलन–छल (३.१) | under the pretext of coiling |
| गोपायति | गोपायति (√गुप् +आय कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | hides |
| स्वम् | स्व (२.१) | its own |
| मुखपुष्करम् | मुख–पुष्कर (२.१) | lotus-like face |
| सः | तद् (१.१) | it |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ऊ | रु | प्र | का | ण्ड | द्वि | त | ये | न | त | न्व्याः |
| क | रः | प | रा | जी | य | त | वा | र | णी | यः |
| यु | क्तं | ह्रि | या | कु | ण्ड | ल | न | च्छ | ले | न |
| गो | पा | य | ति | स्वं | मु | ख | पु | ष्क | रं | सः |
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