रम्भापि किं चिह्नयति प्रकाण्डं
न चात्मनः स्वेन न चैतदूरु ।
स्वस्यैव येनोपरि सा ददाना
पत्राणि जागर्त्यनयोर्भ्रमेण ॥
रम्भापि किं चिह्नयति प्रकाण्डं
न चात्मनः स्वेन न चैतदूरु ।
स्वस्यैव येनोपरि सा ददाना
पत्राणि जागर्त्यनयोर्भ्रमेण ॥
न चात्मनः स्वेन न चैतदूरु ।
स्वस्यैव येनोपरि सा ददाना
पत्राणि जागर्त्यनयोर्भ्रमेण ॥
अन्वयः
AI
रम्भा अपि आत्मनः प्रकाण्डम् स्वेन किम् न चिह्नयति? च एतत् ऊरु न (चिह्नयति)? येन सा अनयोः भ्रमेण स्वस्य उपरि एव पत्राणि ददाना जागर्ति ।
Summary
AI
Does the plantain tree not recognize its own stem, nor this thigh of hers? It seems so, because due to the confusion between the two, it remains vigilant, placing its leaves upon itself (mistaking it for her thigh to cover it).
पदच्छेदः
AI
| रम्भा | रम्भा (१.१) | The plantain tree |
| अपि | अपि | even |
| किम् | किम् | why |
| चिह्नयति | चिह्नयति (√चिह्नय कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | recognize |
| प्रकाण्डम् | प्रकाण्ड (२.१) | its stem |
| न | न | not |
| च | च | and |
| आत्मनः | आत्मन् (६.१) | its own |
| स्वेन | स्व (३.१) | by itself |
| न | न | not |
| च | च | and |
| एतत् | एतद् (२.१) | this |
| ऊरु | ऊरु (२.१) | thigh |
| स्वस्य | स्व (६.१) | its own |
| एव | एव | only |
| येन | यद् (३.१) | due to which |
| उपरि | उपरि | upon |
| सा | तद् (१.१) | it |
| ददाना | ददान (√दा+शानच्, १.१) | placing |
| पत्राणि | पत्र (२.३) | leaves |
| जागर्ति | जागर्ति (√जागृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | remains vigilant |
| अनयोः | इदम् (६.२) | of these two |
| भ्रमेण | भ्रम (३.१) | due to confusion |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| र | म्भा | पि | किं | चि | ह्न | य | ति | प्र | का | ण्डं |
| न | चा | त्म | नः | स्वे | न | न | चै | त | दू | रु |
| स्व | स्यै | व | ये | नो | प | रि | सा | द | दा | ना |
| प | त्रा | णि | जा | ग | र्त्य | न | यो | र्भ्र | मे | ण |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.