भ्रूश्चित्रलेखा च तिलोत्तमास्या
नासा च रम्भा च यदूरुसृष्टिः ।
दृष्टा ततः पूरयतीयमेकान्
एकाप्सरः प्रेक्षणकौतुकानि ॥
भ्रूश्चित्रलेखा च तिलोत्तमास्या
नासा च रम्भा च यदूरुसृष्टिः ।
दृष्टा ततः पूरयतीयमेकान्
एकाप्सरः प्रेक्षणकौतुकानि ॥
नासा च रम्भा च यदूरुसृष्टिः ।
दृष्टा ततः पूरयतीयमेकान्
एकाप्सरः प्रेक्षणकौतुकानि ॥
अन्वयः
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यत् अस्याः भ्रूः चित्रलेखा च, नासा तिलोत्तमा च, ऊरुसृष्टिः रम्भा च दृष्टा, ततः इयम् एका एकाप्सरः प्रेक्षणकौतुकानि पूरयति ।
Summary
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Since her eyebrow is seen as the Apsaras Chitralekha, her nose as Tilottama, and the creation of her thighs as Rambha, she alone fulfills the desires of those who wish to see each of these celestial nymphs individually.
पदच्छेदः
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| भ्रूः | भ्रू (१.१) | Her eyebrow |
| च | च | and |
| चित्रलेखा | चित्रलेखा (१.१) | is Chitralekha |
| च | च | and |
| तिलोत्तमा | तिलोत्तमा (१.१) | is Tilottama |
| अस्याः | इदम् (६.१) | her |
| नासा | नासा (१.१) | nose |
| च | च | and |
| रम्भा | रम्भा (१.१) | is Rambha |
| च | च | and |
| यत् | यत् | since |
| ऊरुसृष्टिः | ऊरु–सृष्टि (१.१) | the creation of her thighs |
| दृष्टा | दृष्ट (√दृश्+क्त, १.१) | is seen |
| ततः | ततः | therefore |
| पूरयति | पूरयति (√पॄ +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | fulfills |
| इयम् | इदम् (१.१) | she |
| एकान् | एक (२.३) | individual |
| एकाप्सरःप्रेक्षणकौतुकानि | एक–अप्सरस्–प्रेक्षण–कौतुक (२.३) | the desires of seeing each Apsaras |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भ्रू | श्चि | त्र | ले | खा | च | ति | लो | त्त | मा | स्या |
| ना | सा | च | र | म्भा | च | य | दू | रु | सृ | ष्टिः |
| दृ | ष्टा | त | तः | पू | र | य | ती | य | मे | का |
| ने | का | प्स | रः | प्रे | क्ष | ण | कौ | तु | का | नि |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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