रोमवलीदण्डनितम्बचक्रे
गुणं च लावण्यजलं च बाला ।
तारुण्यमूर्तेः कुचकुम्भकर्तुः
बिभर्ति शङ्केः सहकारिचक्रम् ॥
रोमवलीदण्डनितम्बचक्रे
गुणं च लावण्यजलं च बाला ।
तारुण्यमूर्तेः कुचकुम्भकर्तुः
बिभर्ति शङ्केः सहकारिचक्रम् ॥
गुणं च लावण्यजलं च बाला ।
तारुण्यमूर्तेः कुचकुम्भकर्तुः
बिभर्ति शङ्केः सहकारिचक्रम् ॥
अन्वयः
AI
शङ्के, बाला तारुण्यमूर्तेः कुचकुम्भकर्तुः रोमवलीदण्डनितम्बचक्रे गुणम् च लावण्यजलम् च सहकारिचक्रम् बिभर्ति ।
Summary
AI
I suspect that this young lady provides the collection of auxiliary causes—the string (of her waist-folds) and the water of her loveliness—on the potter's wheel of her hips with its stick-like hair-line, for the potter of youth who fashions the pitchers of her breasts.
पदच्छेदः
AI
| रोमवलीदण्डनितम्बचक्रे | रोम–आवली–दण्ड–नितम्ब–चक्र (७.१) | on the potter's wheel of her hips with the stick of her hair-line |
| गुणम् | गुण (२.१) | the string |
| च | च | and |
| लावण्यजलम् | लावण्य–जल (२.१) | the water of loveliness |
| च | च | and |
| बाला | बाला (१.१) | the young lady |
| तारुण्यमूर्तेः | तारुण्य–मूर्ति (६.१) | of the potter of youth |
| कुचकुम्भकर्तुः | कुच–कुम्भ–कर्तृ (६.१) | the maker of the breast-pitchers |
| बिभर्ति | बिभर्ति (√भृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | provides |
| शङ्के | शङ्के (√शङ्क् कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I suspect |
| सहकारिचक्रम् | सहकारिन्–चक्र (२.१) | the collection of auxiliary causes |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रो | म | व | ली | द | ण्ड | नि | त | म्ब | च | क्रे |
| गु | णं | च | ला | व | ण्य | ज | लं | च | बा | ला |
| ता | रु | ण्य | मू | र्तेः | कु | च | कु | म्भ | क | र्तुः |
| बि | भ | र्ति | श | ङ्केः | स | ह | का | रि | च | क्रम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.