स्तनावटे चन्दनपङ्किलेऽस्या
जातस्य यावद्युवमानसानाम् ।
हारावलीरत्नमयूखधारा-
काराः स्फुरन्ति स्खलनस्य रेखाः ॥
स्तनावटे चन्दनपङ्किलेऽस्या
जातस्य यावद्युवमानसानाम् ।
हारावलीरत्नमयूखधारा-
काराः स्फुरन्ति स्खलनस्य रेखाः ॥
जातस्य यावद्युवमानसानाम् ।
हारावलीरत्नमयूखधारा-
काराः स्फुरन्ति स्खलनस्य रेखाः ॥
अन्वयः
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अस्याः चन्दनपङ्किले स्तन अवटे जातस्य यावत् युवमानसानाम् स्खलनस्य रेखाः हारावलीरत्नमयूखधाराकाराः स्फुरन्ति ।
Summary
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In the space between her breasts, smeared with sandalwood paste, the lines marking the stumbles of countless young minds appear, shining like streams of light from the gems of her pearl necklace.
पदच्छेदः
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| स्तन | स्तन | breast |
| अवटे | अवट (७.१) | in the space between |
| चन्दनपङ्किले | चन्दन–पङ्किल (७.१) | smeared with sandalwood paste |
| अस्याः | इदम् (६.१) | of her |
| जातस्य | जात (√जन्+क्त, ६.३) | of the born/occurred |
| यावत् | यावत् (१.३) | all the |
| युवमानसानाम् | युवन्–मानस (६.३) | of the minds of youths |
| हारावलीरत्नमयूखधाराकाराः | हार–आवली–रत्न–मयूख–धारा–आकार (१.३) | having the form of streams of light from the gems of her pearl necklace |
| स्फुरन्ति | स्फुरन्ति (√स्फुर् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | shine |
| स्खलनस्य | स्खलन (६.१) | of the stumbling |
| रेखाः | रेखा (१.३) | the lines |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्त | ना | व | टे | च | न्द | न | प | ङ्कि | ले | ऽस्या |
| जा | त | स्य | या | व | द्यु | व | मा | न | सा | नाम् |
| हा | रा | व | ली | र | त्न | म | यू | ख | धा | रा |
| का | राः | स्फु | र | न्ति | स्ख | ल | न | स्य | रे | खाः |
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