तालं प्रभु स्यादनुकर्तुमेता-
वुत्थानसुस्थौ पतितं न तावत् ।
परं च नाश्रित्य तरुं महान्तं
कुचौ कृशाङ्ग्याः स्वत एव तुङ्गौ ॥
तालं प्रभु स्यादनुकर्तुमेता-
वुत्थानसुस्थौ पतितं न तावत् ।
परं च नाश्रित्य तरुं महान्तं
कुचौ कृशाङ्ग्याः स्वत एव तुङ्गौ ॥
वुत्थानसुस्थौ पतितं न तावत् ।
परं च नाश्रित्य तरुं महान्तं
कुचौ कृशाङ्ग्याः स्वत एव तुङ्गौ ॥
अन्वयः
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उत्थान-सुस्थौ एतौ (कुचौ) पतितम् तालम् अनुकर्तुम् प्रभु स्यात्, तावत् न । परम् च कृशाङ्ग्याः कुचौ महान्तम् तरुम् न आश्रित्य स्वतः एव तुङ्गौ (स्तः) ।
Summary
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These firm, rising breasts might be able to imitate a fallen Tāla fruit, but not one still on the tree. Moreover, the breasts of the slender-bodied one are lofty by themselves, not depending on a great tree for support.
पदच्छेदः
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| तालम् | ताल (२.१) | the Tāla fruit |
| प्रभु | प्रभु (१.१) | able |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | may be |
| अनुकर्तुम् | अनुकर्तुम् (अनु√कृ+तुमुन्) | to imitate |
| एतौ | एतद् (१.२) | these two |
| उत्थानसुस्थौ | उत्थान-सुस्थ (१.२) | firm in their rising |
| पतितम् | पतित (√पत्+क्त, २.१) | the fallen one |
| न | न | not |
| तावत् | तावत् | so much |
| परम् | परम् | but |
| च | च | and |
| न | न | not |
| आश्रित्य | आश्रित्य (आ√श्रि+ल्यप्) | having taken support of |
| तरुम् | तरु (२.१) | a tree |
| महान्तम् | महत् (२.१) | a great |
| कुचौ | कुच (१.२) | the breasts |
| कृशाङ्ग्याः | कृशाङ्गी (६.१) | of the slender-bodied one |
| स्वतः | स्वतस् | by themselves |
| एव | एव | indeed |
| तुङ्गौ | तुङ्ग (१.२) | lofty |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | लं | प्र | भु | स्या | द | नु | क | र्तु | मे | ता |
| वु | त्था | न | सु | स्थौ | प | ति | तं | न | ता | वत् |
| प | रं | च | ना | श्रि | त्य | त | रुं | म | हा | न्तं |
| कु | चौ | कृ | शा | ङ्ग्याः | स्व | त | ए | व | तु | ङ्गौ |
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