किं नर्मदाया मम सेयमस्या
दृश्याभितो बाहुलतामृणाली ।
कुचौ किमुत्तस्थतुरन्तरीये
स्मरोष्मशुष्यत्तरबाल्यवारः ॥
किं नर्मदाया मम सेयमस्या
दृश्याभितो बाहुलतामृणाली ।
कुचौ किमुत्तस्थतुरन्तरीये
स्मरोष्मशुष्यत्तरबाल्यवारः ॥
दृश्याभितो बाहुलतामृणाली ।
कुचौ किमुत्तस्थतुरन्तरीये
स्मरोष्मशुष्यत्तरबाल्यवारः ॥
अन्वयः
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किम् इयम् अस्याः बाहु-लता-मृणाली अभितः दृश्या सा मम नर्मदायाः? अन्तरीये स्मर-उष्म-शुष्यत्-तर-बाल्य-वारः (सति) कुचौ किम् उत्तस्थतुः?
Summary
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Are these creeper-like arms, visible on both sides, my Narmada river? And as the waters of her childhood dried up due to the heat of nascent love, did her breasts rise up like two cakravāka birds?
पदच्छेदः
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| किम् | किम् | is it? |
| नर्मदायाः | नर्मदा (६.१) | of the Narmada river |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| सा | तद् (१.१) | that |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| अस्याः | इदम् (६.१) | of her |
| दृश्या | दृश्य (√दृश्+ण्यत्, १.१) | visible |
| अभितः | अभितस् | on both sides |
| बाहुलतामृणाली | बाहु-लता-मृणाली (१.१) | the creeper-like arms resembling lotus-stalks |
| कुचौ | कुच (१.२) | the two breasts |
| किम् | किम् | is it that? |
| उत्तस्थतुः | उत्तस्थतुः (उद्√स्था कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | rose up |
| अन्तरीये | अन्तरीय (७.१) | in the middle |
| स्मरोष्मशुष्यत्तरबाल्यवारः | स्मर-उष्म-शुष्यत्-तर-बाल्य-वार (१.१) | the water of childhood which was drying up more and more due to the heat of love |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| किं | न | र्म | दा | या | म | म | से | य | म | स्या |
| दृ | श्या | भि | तो | बा | हु | ल | ता | मृ | णा | ली |
| कु | चौ | कि | मु | त्त | स्थ | तु | र | न्त | री | ये |
| स्म | रो | ष्म | शु | ष्य | त्त | र | बा | ल्य | वा | रः |
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