अस्याः करस्पर्धनगर्धनर्द्धिः
बालत्वमापत्खलु पल्लवो यः ।
भूयोऽपि नामाधरसाम्यगर्वं
कुर्वन्कथं वास्तु न स प्रवालः ॥
अस्याः करस्पर्धनगर्धनर्द्धिः
बालत्वमापत्खलु पल्लवो यः ।
भूयोऽपि नामाधरसाम्यगर्वं
कुर्वन्कथं वास्तु न स प्रवालः ॥
बालत्वमापत्खलु पल्लवो यः ।
भूयोऽपि नामाधरसाम्यगर्वं
कुर्वन्कथं वास्तु न स प्रवालः ॥
अन्वयः
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यः पल्लवः अस्याः कर-स्पर्धन-गर्ध-न-ऋद्धिः (सन्) बालत्वम् आपत् खलु, सः भूयः अपि अधर-साम्य-गर्वम् कुर्वन् कथम् वा प्रवालः न अस्तु?
Summary
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The tender shoot, which failed in its greedy attempt to rival her hand, indeed attained its state of newness. How can it not become a coral if it again shows the pride of claiming similarity with her lip?
पदच्छेदः
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| अस्याः | इदम् (६.१) | of her |
| करस्पर्धनगर्धनर्द्धिः | कर-स्पर्धन-गर्ध-न-ऋद्धि (१.१) | whose prosperity was not from the desire to rival her hand |
| बालत्वम् | बालत्व (२.१) | newness/tenderness |
| आपत् | आपत् (√आप् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attained |
| खलु | खलु | indeed |
| पल्लवः | पल्लव (१.१) | the sprout |
| यः | यद् (१.१) | which |
| भूयः | भूयस् | again |
| अपि | अपि | also |
| नाम | नाम | indeed |
| अधरसाम्यगर्वम् | अधर-साम्य-गर्व (२.१) | the pride of similarity with her lip |
| कुर्वन् | कुर्वत् (√कृ+शतृ, १.१) | doing |
| कथम् | कथम् | how |
| वा | वा | or |
| अस्तु | अस्तु (√अस् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let it be |
| न | न | not |
| सः | तद् (१.१) | that |
| प्रवालः | प्रवाल (१.१) | a coral/new shoot |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | स्याः | क | र | स्प | र्ध | न | ग | र्ध | न | र्द्धिः |
| बा | ल | त्व | मा | प | त्ख | लु | प | ल्ल | वो | यः |
| भू | यो | ऽपि | ना | मा | ध | र | सा | म्य | ग | र्वं |
| कु | र्व | न्क | थं | वा | स्तु | न | स | प्र | वा | लः |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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