कवित्वगानप्रियवादसत्या-
न्यस्या विधाता व्यधिताधिकण्ठम् ।
रेखात्रयन्यासमिषादमीषां
वासाय सोऽयं विबभाज सीमाः ॥
कवित्वगानप्रियवादसत्या-
न्यस्या विधाता व्यधिताधिकण्ठम् ।
रेखात्रयन्यासमिषादमीषां
वासाय सोऽयं विबभाज सीमाः ॥
न्यस्या विधाता व्यधिताधिकण्ठम् ।
रेखात्रयन्यासमिषादमीषां
वासाय सोऽयं विबभाज सीमाः ॥
अन्वयः
AI
सः अयम् विधाता अस्याः अधिकण्ठम् कवित्व-गान-प्रियवाद-सत्यानि व्यधित । अमीषाम् वासाय रेखा-त्रय-न्यास-मिषात् सीमाः विबभाज ।
Summary
AI
The creator placed poetry, song, pleasant speech, and truth in her throat. On the pretext of drawing three lines on her neck, he allotted separate boundaries for the residence of each of these qualities.
पदच्छेदः
AI
| कवित्वगानप्रियवादसत्यानि | कवित्व-गान-प्रियवाद-सत्य (२.३) | poetry, song, pleasant speech, and truth |
| अस्याः | इदम् (६.१) | of her |
| विधाता | विधातृ (१.१) | the Creator |
| व्यधित | व्यधित (वि√धा कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | placed |
| अधिकण्ठम् | अधिकण्ठम् | in the throat |
| रेखात्रयन्यासमिषात् | रेखा-त्रय-न्यास-मिष (५.१) | on the pretext of placing the three lines |
| अमीषाम् | अदस् (६.३) | for these |
| वासाय | वास (४.१) | for residence |
| सोऽयम् | – | |
| विबभाज | विबभाज (वि√भज् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | allotted |
| सीमाः | सीमन् (२.३) | boundaries |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | वि | त्व | गा | न | प्रि | य | वा | द | स | त्या |
| न्य | स्या | वि | धा | ता | व्य | धि | ता | धि | क | ण्ठम् |
| रे | खा | त्र | य | न्या | स | मि | षा | द | मी | षां |
| वा | सा | य | सो | ऽयं | वि | ब | भा | ज | सी | माः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.