आत्मैव तातस्य चतुर्भुजस्य
जातश्चतुर्दोरुचितः स्मरोऽपि ।
तच्चापयोः कर्णलते भ्रुवोर्ज्ये
वंशत्यगंशौ चिपिटे किमस्याः ॥
आत्मैव तातस्य चतुर्भुजस्य
जातश्चतुर्दोरुचितः स्मरोऽपि ।
तच्चापयोः कर्णलते भ्रुवोर्ज्ये
वंशत्यगंशौ चिपिटे किमस्याः ॥
जातश्चतुर्दोरुचितः स्मरोऽपि ।
तच्चापयोः कर्णलते भ्रुवोर्ज्ये
वंशत्यगंशौ चिपिटे किमस्याः ॥
अन्वयः
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चतुर्भुजस्य तातस्य आत्मा स्मरः अपि चतुः-दोः-उचितः जातः । तत् (तस्मात्) अस्याः कर्णलते चापयोः, भ्रुवोः ज्ये, वंश-त्यक्-अंशौ चिपिटे किम्?
Summary
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Kamadeva, being the son of the four-armed Vishnu, was also born fit for four arms. Is it for this reason that her creeper-like ears serve as his two bows, her eyebrows as the two bowstrings, and the flattened parts are the non-bamboo sections of the bows?
पदच्छेदः
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| आत्मैव | – | |
| तातस्य | तात (६.१) | of the father |
| चतुर्भुजस्य | चतुर्भुज (६.१) | of the four-armed one (Vishnu) |
| जातः | जात (√जन्+क्त, १.१) | was born |
| चतुर्दोरुचितः | चतुः-दोः-उचित (१.१) | fit for four arms |
| स्मरोऽपि | – | |
| तत् | तद् | therefore |
| चापयोः | चाप (६.२) | of the two bows |
| कर्णलते | कर्णलता (१.२) | the two creeper-like ears |
| भ्रुवोः | भ्रू (६.२) | of the two eyebrows |
| ज्ये | ज्या (१.२) | the two bowstrings |
| वंशत्यगंशौ | वंश-त्यक्-अंश (१.२) | the two non-bamboo parts (tips) |
| चिपिटे | चिपिट (१.२) | flattened |
| किम् | किम् | is it that? |
| अस्याः | इदम् (६.१) | of her |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | त्मै | व | ता | त | स्य | च | तु | र्भु | ज | स्य |
| जा | त | श्च | तु | र्दो | रु | चि | तः | स्म | रो | ऽपि |
| त | च्चा | प | योः | क | र्ण | ल | ते | भ्रु | वो | र्ज्ये |
| वं | श | त्य | गं | शौ | चि | पि | टे | कि | म | स्याः |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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