अस्या यदष्टादश संविभज्य
विद्याः श्रुती दध्रतुरर्धमर्धम् ।
कर्णान्तरुत्कीर्णगभीररेखः
किं तस्य संख्यैव नवा नवाङ्कः ॥
अस्या यदष्टादश संविभज्य
विद्याः श्रुती दध्रतुरर्धमर्धम् ।
कर्णान्तरुत्कीर्णगभीररेखः
किं तस्य संख्यैव नवा नवाङ्कः ॥
विद्याः श्रुती दध्रतुरर्धमर्धम् ।
कर्णान्तरुत्कीर्णगभीररेखः
किं तस्य संख्यैव नवा नवाङ्कः ॥
अन्वयः
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यत् अस्याः श्रुती अष्टादश विद्याः अर्धम् अर्धम् संविभज्य दध्रतुः, (तत्) कर्ण-अन्तः-उत्कीर्ण-गभीर-रेखः नव नव अङ्कः किम् तस्य संख्या एव?
Summary
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Since her two ears held the eighteen branches of knowledge, having divided them half and half, is the deep line carved inside her ear the numeral nine, representing that number (nine sciences in each ear)?
पदच्छेदः
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| अस्याः | इदम् (६.१) | of her |
| यत् | यद् | since |
| अष्टादश | अष्टादशन् (२.३) | eighteen |
| संविभज्य | संविभज्य (सम्+वि√भज्+ल्यप्) | having divided |
| विद्याः | विद्या (२.३) | sciences |
| श्रुती | श्रुति (१.२) | the two ears |
| दध्रतुः | दध्रतुः (√धृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | the two held |
| अर्धम् | अर्ध (२.१) | half |
| अर्धम् | अर्ध (२.१) | and half |
| कर्णान्तरुत्कीर्णगभीररेखः | कर्ण-अन्तः-उत्कीर्ण-गभीर-रेख (१.१) | the deep line carved inside the ear |
| किम् | किम् | is it? |
| तस्य | तद् (६.१) | of that |
| संख्यैव | – | |
| नवा | नवन् (१.१) | nine |
| नवाङ्कः | नव-अङ्क (१.१) | the numeral nine |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | स्या | य | द | ष्टा | द | श | सं | वि | भ | ज्य |
| वि | द्याः | श्रु | ती | द | ध्र | तु | र | र्ध | म | र्धम् |
| क | र्णा | न्त | रु | त्की | र्ण | ग | भी | र | रे | खः |
| किं | त | स्य | सं | ख्यै | व | न | वा | न | वा | ङ्कः |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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