चन्द्राधिकैतन्मुखचन्द्रिकाणां
दरायतं तत्किरणाद्धनानाम् ।
पुरः सरस्रस्तपृषद्द्वितीयं
रदावलिद्वन्द्वति बिन्दुवृन्दम् ॥
चन्द्राधिकैतन्मुखचन्द्रिकाणां
दरायतं तत्किरणाद्धनानाम् ।
पुरः सरस्रस्तपृषद्द्वितीयं
रदावलिद्वन्द्वति बिन्दुवृन्दम् ॥
दरायतं तत्किरणाद्धनानाम् ।
पुरः सरस्रस्तपृषद्द्वितीयं
रदावलिद्वन्द्वति बिन्दुवृन्दम् ॥
अन्वयः
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चन्द्र-अधिक-एतत्-मुख-चन्द्रिकाणाम् घनानाम् तत्-किरणात् दर-आयतम्, पुरः सर-स्रस्त-पृषत्-द्वितीयम् बिन्दु-वृन्दम् रद-अवलि-द्वन्द्वति ।
Summary
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The cluster of drops, slightly elongated from the ray of her smile which emanates from the moonlight of her face (surpassing the moon's), and accompanied by droplets fallen from the nectar in front, acts like a second pair of rows of teeth.
पदच्छेदः
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| चन्द्र-अधिक-एतत्-मुख-चन्द्रिकाणाम् | चन्द्र–अधिक–एतत्–मुख–चन्द्रिका (६.३) | of the moonbeams from this face which are superior to the moon |
| दर-आयतम् | दर–आयत (१.१) | slightly long |
| तत्-किरणात् | तत्–किरण (५.१) | from that ray (of smile) |
| घनानाम् | घन (६.३) | of the dense (teeth) |
| पुरः | पुरस् | in front |
| सर-स्रस्त-पृषत्-द्वितीयम् | सर–स्रस्त (√स्रंस्+क्त)–पृषत्–द्वितीय (१.१) | accompanied by drops fallen from the nectar |
| रद-अवलि-द्वन्द्वति | रदावलिद्वन्द्वति (√रदावलिद्वन्द्व कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | acts like a pair of rows of teeth |
| बिन्दु-वृन्दम् | बिन्दु–वृन्द (१.१) | the collection of drops |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| च | न्द्रा | धि | कै | त | न्मु | ख | च | न्द्रि | का | णां |
| द | रा | य | तं | त | त्कि | र | णा | द्ध | ना | नाम् |
| पु | रः | स | र | स्र | स्त | पृ | ष | द्द्वि | ती | यं |
| र | दा | व | लि | द्व | न्द्व | ति | बि | न्दु | वृ | न्दम् |
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