मध्योपकण्ठावधरोष्ठभागौ
भातः किमप्युच्छृसितौ यदस्याः ।
तत्स्वप्नसंभोगवितीर्णदन्त-
दंशेन किं वा न मयापराद्धम् ॥
मध्योपकण्ठावधरोष्ठभागौ
भातः किमप्युच्छृसितौ यदस्याः ।
तत्स्वप्नसंभोगवितीर्णदन्त-
दंशेन किं वा न मयापराद्धम् ॥
भातः किमप्युच्छृसितौ यदस्याः ।
तत्स्वप्नसंभोगवितीर्णदन्त-
दंशेन किं वा न मयापराद्धम् ॥
अन्वयः
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यत् अस्याः मध्य-उपकण्ठौ अधर-ओष्ठ-भागौ किम् अपि उच्छ्वसितौ भातः, तत् स्वप्न-संभोग-वितीर्ण-दन्त-दंशेन मया किम् वा न अपराद्धम्?
Summary
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Nala wonders: "Since the parts of her lower lip near the middle appear somewhat swollen, is it not that I have wronged her with a love-bite given during our union in a dream?"
पदच्छेदः
AI
| मध्य-उपकण्ठौ | मध्य–उपकण्ठ (१.२) | the two parts near the middle |
| अधर-ओष्ठ-भागौ | अधर–ओष्ठ–भाग (१.२) | the parts of the lower lip |
| भातः | भातः (√भा कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. द्वि.) | appear |
| किम् | किम् | somewhat |
| अपि | अपि | |
| उच्छ्वसितौ | उच्छ्वसित (उद्√श्वस्+क्त, १.२) | swollen |
| यत् | यद् | that/since |
| अस्याः | इदम् (६.१) | of her |
| तत् | तद् | therefore |
| स्वप्न-संभोग-वितीर्ण-दन्त-दंशेन | स्वप्न–संभोग–वितीर्ण (वि√तृ+क्त)–दन्त–दंश (३.१) | by the tooth-bite given in a dream union |
| किम् | किम् | is it that |
| वा | वा | or |
| न | न | not |
| मया | अस्मद् (३.१) | by me |
| अपराद्धम् | अपराद्ध (अप√राध्+क्त, १.१) | wronged |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | ध्यो | प | क | ण्ठा | व | ध | रो | ष्ठ | भा | गौ |
| भा | तः | कि | म | प्यु | च्छृ | सि | तौ | य | द | स्याः |
| त | त्स्व | प्न | सं | भो | ग | वि | ती | र्ण | द | न्त |
| दं | शे | न | किं | वा | न | म | या | प | रा | द्धम् |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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