दृशौ किमस्याश्चपलस्वभावे
न दूरमाक्रम्य मिथो मिलेताम् ।
न चेत्कृतः स्यादनयोः प्रयाणे
विघ्नः श्रवः कूपनिपातभीत्या ॥
दृशौ किमस्याश्चपलस्वभावे
न दूरमाक्रम्य मिथो मिलेताम् ।
न चेत्कृतः स्यादनयोः प्रयाणे
विघ्नः श्रवः कूपनिपातभीत्या ॥
न दूरमाक्रम्य मिथो मिलेताम् ।
न चेत्कृतः स्यादनयोः प्रयाणे
विघ्नः श्रवः कूपनिपातभीत्या ॥
अन्वयः
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अस्याः चपल-स्वभावे दृशौ दूरम् आक्रम्य मिथः मिलेताम्, चेत् श्रवः-कूप-निपात-भीत्या अनयोः प्रयाणे विघ्नः न कृतः स्यात् ।
Summary
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Would her two eyes, restless by nature, not have met each other after traveling a long distance (around her head)? They certainly would have, if an obstacle had not been placed in their path by the fear of falling into the pits of her ears.
पदच्छेदः
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| दृशौ | दृश् (१.२) | The two eyes |
| किम् | किम् | (rhetorical) |
| अस्याः | इदम् (६.१) | of her |
| चपल-स्वभावे | चपल–स्वभाव (१.२) | restless by nature |
| न | न | not |
| दूरम् | दूरम् | far |
| आक्रम्य | आक्रम्य (आ√क्रम्+ल्यप्) | having traversed |
| मिथः | मिथस् | each other |
| मिलेताम् | मिलेताम् (√मिल् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | would meet |
| न | न | not |
| चेत् | चेत् | if |
| कृतः | कृत (√कृ+क्त, १.१) | made |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | it were |
| अनयोः | इदम् (६.२) | of these two |
| प्रयाणे | प्रयाण (७.१) | in the journey |
| विघ्नः | विघ्न (१.१) | an obstacle |
| श्रवः-कूप-निपात-भीत्या | श्रवस्–कूप–निपात–भीति (३.१) | by the fear of falling into the pits of the ears |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दृ | शौ | कि | म | स्या | श्च | प | ल | स्व | भा | वे |
| न | दू | र | मा | क्र | म्य | मि | थो | मि | ले | ताम् |
| न | चे | त्कृ | तः | स्या | द | न | योः | प्र | या | णे |
| वि | घ्नः | श्र | वः | कू | प | नि | पा | त | भी | त्या |
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