ब्रह्माद्वयस्यान्वभवत्प्रमोदं
रोमाग्र एवाग्रनिरीक्षितेऽस्याः ।
यथौचितीत्थं तदशेषदृष्टा-
वथ स्मराद्वैतमुदं तथासौ ॥
ब्रह्माद्वयस्यान्वभवत्प्रमोदं
रोमाग्र एवाग्रनिरीक्षितेऽस्याः ।
यथौचितीत्थं तदशेषदृष्टा-
वथ स्मराद्वैतमुदं तथासौ ॥
रोमाग्र एवाग्रनिरीक्षितेऽस्याः ।
यथौचितीत्थं तदशेषदृष्टा-
वथ स्मराद्वैतमुदं तथासौ ॥
अन्वयः
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असौ अस्याः अग्रनिरीक्षिते (सति) रोमाग्रे एव ब्रह्माद्वयस्य प्रमोदम् अन्वभवत्। अथ इत्थम् यथौचिती (सति) तदशेषदृष्टौ तथा स्मराद्वैतमुदम् (अन्वभवत्)।
Summary
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At the very first glance of her, he experienced the joy of non-dual Brahman at the very tips of his hair. Then, as was proper, upon seeing her completely, he experienced the joy of non-duality with the god of love, Kama.
पदच्छेदः
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| ब्रह्माद्वयस्य | ब्रह्मन्–अद्वय (६.१) | of the non-dual Brahman |
| अन्वभवत् | अन्वभवत् (अनु√भू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | experienced |
| प्रमोदम् | प्रमोद (२.१) | the joy |
| रोमाग्रे | रोमन्–अग्र (७.१) | at the tip of the hair |
| एव | एव | only |
| अग्रनिरीक्षिते | अग्र–निरीक्षित (निस्√ईक्ष्+क्त, ७.१) | at the first glance |
| अस्याः | इदम् (६.१) | of her |
| यथौचिती | यथा–उचिति | as was proper |
| इत्थम् | इत्थम् | thus |
| तदशेषदृष्टौ | तद्–अशेष–दृष्टि (७.१) | on seeing her entirely |
| अथ | अथ | then |
| स्मराद्वैतमुदम् | स्मर–अद्वैत–मुद् (२.१) | the joy of non-duality with Kama |
| तथा | तथा | so |
| असौ | अदस् (१.१) | he |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ब्र | ह्मा | द्व | य | स्या | न्व | भ | व | त्प्र | मो | दं |
| रो | मा | ग्र | ए | वा | ग्र | नि | री | क्षि | ते | ऽस्याः |
| य | थौ | चि | ती | त्थं | त | द | शे | ष | दृ | ष्टा |
| व | थ | स्म | रा | द्वै | त | मु | दं | त | था | सौ |
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