प्रतिप्रतीकं प्रथमं प्रियायाम्
अथान्तरानन्दसुधासमुद्रे ।
ततः प्रमोदाश्रुपरम्पराणां
ममज्जतुस्तस्य दृशौ नृपस्य ॥
प्रतिप्रतीकं प्रथमं प्रियायाम्
अथान्तरानन्दसुधासमुद्रे ।
ततः प्रमोदाश्रुपरम्पराणां
ममज्जतुस्तस्य दृशौ नृपस्य ॥
अथान्तरानन्दसुधासमुद्रे ।
ततः प्रमोदाश्रुपरम्पराणां
ममज्जतुस्तस्य दृशौ नृपस्य ॥
अन्वयः
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प्रथमम् तस्य नृपस्य दृशौ प्रियायाम् प्रतिप्रतीकम् (ममज्जतुः), अथ अन्तरानन्दसुधासमुद्रे (ममज्जतुः), ततः प्रमोद-अश्रु-परम्पराणाम् (मध्ये) ममज्जतुः।
Summary
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First, the two eyes of that king plunged into each limb of his beloved. Then, they sank into the ocean of the nectar of inner joy. Thereafter, they drowned amidst a series of tears of joy.
पदच्छेदः
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| प्रतिप्रतीकम् | प्रतिप्रतीकम् | on each and every limb |
| प्रथमम् | प्रथमम् | First |
| प्रियायाम् | प्रिया (७.१) | on his beloved |
| अथ | अथ | then |
| अन्तरानन्दसुधासमुद्रे | अन्तर–आनन्द–सुधा–समुद्र (७.१) | in the ocean of nectar of inner joy |
| ततः | ततः | thereafter |
| प्रमोदाश्रुपरम्पराणाम् | प्रमोद–अश्रु–परम्परा (६.३) | of the series of tears of joy |
| ममज्जतुः | ममज्जतुः (√मस्ज् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | plunged |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| दृशौ | दृश् (१.२) | two eyes |
| नृपस्य | नृप (६.१) | of the king |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | ति | प्र | ती | कं | प्र | थ | मं | प्रि | या | या |
| म | था | न्त | रा | न | न्द | सु | धा | स | मु | द्रे |
| त | तः | प्र | मो | दा | श्रु | प | र | म्प | रा | णां |
| म | म | ज्ज | तु | स्त | स्य | दृ | शौ | नृ | प | स्य |
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||
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