स्मारं धनुर्यद्विधुनोज्झितास्या
यास्येन भूतेन च लक्ष्मलेखा ।
एतद्भ्रुवौ जन्म तदाप युग्मं
लीलाचलत्वोचितबालभावम् ॥
स्मारं धनुर्यद्विधुनोज्झितास्या
यास्येन भूतेन च लक्ष्मलेखा ।
एतद्भ्रुवौ जन्म तदाप युग्मं
लीलाचलत्वोचितबालभावम् ॥
यास्येन भूतेन च लक्ष्मलेखा ।
एतद्भ्रुवौ जन्म तदाप युग्मं
लीलाचलत्वोचितबालभावम् ॥
अन्वयः
AI
यत् स्मारम् धनुः, (या च) अस्याः यास्येन भूतेन विधुना उज्झिता लक्ष्म-लेखा, (ते द्वे) लीला-चलत्व-उचित-बाल-भावम् एतत् भ्रुवौ युग्मम् (भूत्वा) तदा जन्म आप ।
Summary
AI
Kama's bow and the streak of the deer-mark, which was abandoned by the moon upon becoming a servant to her face, were then reborn as this pair of eyebrows, possessing a youthful state perfectly suited for playful movements.
पदच्छेदः
AI
| स्मारम् | स्मार (१.१) | Kama's |
| धनुः | धनुस् (१.१) | bow |
| यत् | यद् (१.१) | which |
| विधुना | विधु (३.१) | by the moon |
| उज्झिता | उज्झित (√उझ्झ्+क्त, १.१) | was abandoned |
| अस्याः | इदम् (६.१) | her |
| यास्येन | यास्य (३.१) | servant |
| भूतेन | भूत (√भू+क्त, ३.१) | having become |
| च | च | and |
| लक्ष्म-लेखा | लक्ष्मन्–लेखा (१.१) | the streak of the deer-mark |
| एतत् | एतद् (१.१) | this |
| भ्रुवौ | भ्रू (१.२) | pair of eyebrows |
| जन्म | जन्मन् (२.१) | birth |
| तदा | तदा | then |
| आप | आप (√आप् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | obtained |
| युग्मम् | युग्म (१.१) | the pair |
| लीला-चलत्व-उचित-बाल-भावम् | लीला–चलत्व–उचित–बाल–भाव (२.१) | a youthful state suited for playful movements |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्मा | रं | ध | नु | र्य | द्वि | धु | नो | ज्झि | ता | स्या |
| या | स्ये | न | भू | ते | न | च | ल | क्ष्म | ले | खा |
| ए | त | द्भ्रु | वौ | ज | न्म | त | दा | प | यु | ग्मं |
| ली | ला | च | ल | त्वो | चि | त | बा | ल | भा | वम् |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.