पौष्पं धनुः किं मदनस्य दाहे
श्यामीभवत्केसरशेषमासीत् ।
व्यधाद्द्विधेशस्तदपि क्रुधा किं
भैमीभ्रुवौ येन विधिर्यधत्त ॥
पौष्पं धनुः किं मदनस्य दाहे
श्यामीभवत्केसरशेषमासीत् ।
व्यधाद्द्विधेशस्तदपि क्रुधा किं
भैमीभ्रुवौ येन विधिर्यधत्त ॥
श्यामीभवत्केसरशेषमासीत् ।
व्यधाद्द्विधेशस्तदपि क्रुधा किं
भैमीभ्रुवौ येन विधिर्यधत्त ॥
अन्वयः
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मदनस्य दाहे पौष्पम् धनुः किम् श्यामी-भवत्-केसर-शेषम् आसीत्? किम् ईशः क्रुधा तत् अपि द्विधा व्यधात्? येन विधिः भैमी-भ्रुवौ यधत्त ।
Summary
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During the burning of Kama, did his floral bow become merely a remnant of blackened filaments? And did Lord Shiva, in his anger, then break even that into two pieces? It seems so, for the Creator has now fashioned Bhīmī's (Damayanti's) two eyebrows from it.
पदच्छेदः
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| पौष्पम् | पौष्प (१.१) | The floral |
| धनुः | धनुस् (१.१) | bow |
| किम् | किम् | was it? |
| मदनस्य | मदन (६.१) | of Kama |
| दाहे | दाह (७.१) | in the burning |
| श्यामी-भवत्-केसर-शेषम् | श्यामीभवत्–केसर–शेष (१.१) | a remnant of blackened filaments |
| आसीत् | आसीत् (√अस् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was |
| व्यधात् | व्यधात् (वि√धा कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | broke |
| द्विधा | द्विधा | in two |
| ईशः | ईश (१.१) | Lord (Shiva) |
| तत् | तद् (२.१) | that |
| अपि | अपि | even |
| क्रुधा | क्रुध् (३.१) | with anger |
| किम् | किम् | did he? |
| भैमी-भ्रुवौ | भैमी–भ्रू (२.२) | Bhaimi's two eyebrows |
| येन | यद् (३.१) | from which |
| विधिः | विधि (१.१) | the Creator |
| यधत्त | यधत्त (√धा कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | fashioned |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पौ | ष्पं | ध | नुः | किं | म | द | न | स्य | दा | हे |
| श्या | मी | भ | व | त्के | स | र | शे | ष | मा | सीत् |
| व्य | धा | द्द्वि | धे | श | स्त | द | पि | क्रु | धा | किं |
| भै | मी | भ्रु | वौ | ये | न | वि | धि | र्य | ध | त्त |
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