प्रत्यङ्गमस्यामभिकेन रक्षां
कर्तुं मघोनेव निजास्त्रमस्ति ।
वज्रं च भूषामणिमूर्तिधारि
नियोजितं तद्दयुतिकार्मुकं च ॥
प्रत्यङ्गमस्यामभिकेन रक्षां
कर्तुं मघोनेव निजास्त्रमस्ति ।
वज्रं च भूषामणिमूर्तिधारि
नियोजितं तद्दयुतिकार्मुकं च ॥
कर्तुं मघोनेव निजास्त्रमस्ति ।
वज्रं च भूषामणिमूर्तिधारि
नियोजितं तद्दयुतिकार्मुकं च ॥
अन्वयः
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अभिकेन मघोना इव अस्याम् प्रति अङ्गम् रक्षाम् कर्तुम् निज-अस्त्रम् अस्ति । वज्रम् च भूषा-मणि-मूर्ति-धारि तत्-द्युति-कार्मुकम् च नियोजितम् ।
Summary
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Just as the amorous Indra appointed his own weapons to guard every limb of Ahalya, so too are his thunderbolt and his bow (the rainbow) appointed to protect Damayanti, disguised as the gems in her ornaments and the lustre of her body respectively.
पदच्छेदः
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| प्रति | प्रति | for every |
| अङ्गम् | अङ्ग (२.१) | limb |
| अस्याम् | इदम् (७.१) | on her |
| अभिकेन | अभिक (३.१) | by the amorous |
| रक्षाम् | रक्षा (२.१) | protection |
| कर्तुम् | कर्तुम् (√कृ+तुमुन्) | to do |
| मघोना | मघवन् (३.१) | by Indra |
| इव | इव | like |
| निज-अस्त्रम् | निज–अस्त्र (१.१) | his own weapon |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is |
| वज्रम् | वज्र (१.१) | the thunderbolt |
| च | च | and |
| भूषा-मणि-मूर्ति-धारि | भूषा–मणि–मूर्ति–धारि (√धृ+णिन्, १.१) | bearing the form of jewel-ornaments |
| नियोजितम् | नियोजित (नि√युज्+णिच्+क्त, १.१) | is appointed |
| तत्-द्युति-कार्मुकम् | तद्–द्युति–कार्मुक (१.१) | his bow (in the form of) her body's lustre |
| च | च | and |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | त्य | ङ्ग | म | स्या | म | भि | के | न | र | क्षां | |
| क | र्तुं | म | घो | ने | व | नि | जा | स्त्र | म | स्ति | |
| व | ज्रं | च | भू | षा | म | णि | मू | र्ति | धा | रि | |
| नि | यो | जि | तं | त | द्द | यु | ति | का | र्मु | कं | च |
| त | त | ज | ग | ग | |||||||
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