भव्यानि हानीरगुरेतदङ्गा-
द्यथा यथानर्ति तथा तथा तैः ।
अस्याधिकस्योपमयोपमाता
दाता प्रतिष्ठां खलु तेभ्य एव ॥
भव्यानि हानीरगुरेतदङ्गा-
द्यथा यथानर्ति तथा तथा तैः ।
अस्याधिकस्योपमयोपमाता
दाता प्रतिष्ठां खलु तेभ्य एव ॥
द्यथा यथानर्ति तथा तथा तैः ।
अस्याधिकस्योपमयोपमाता
दाता प्रतिष्ठां खलु तेभ्य एव ॥
अन्वयः
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एतत्-अङ्गात् भव्यानि हानिम् अगुः। उपमाता यथा यथा अनर्ति, तथा तथा अस्याः अधिकस्य तैः (अङ्गैः) उपमया तेभ्यः (भव्येभ्यः) एव खलु प्रतिष्ठाम् दाता (भवति)।
Summary
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All beautiful objects used as standards of comparison suffer defeat from her limbs. As a comparer enthusiastically attempts to draw a parallel, he, by that very act of comparing her superior limbs, ends up only giving fame to those inferior objects.
पदच्छेदः
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| भव्यानि | भव्य (१.१) | All beautiful objects |
| हानिम् | हानि (२.१) | defeat |
| अगुः | अगुः (√गम् कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | suffered |
| एतदङ्गात् | एतद्–अङ्ग (५.१) | from her limbs |
| यथा | यथा | as |
| यथा | यथा | and when |
| अनर्ति | अनर्ति (√नृत् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attempts enthusiastically |
| तथा | तथा | so |
| तथा | तथा | and so |
| तैः | तद् (३.३) | by them (her limbs) |
| अस्याः | इदम् (६.१) | of her |
| अधिकस्य | अधिक (६.१) | of the superior one |
| उपमया | उपमा (३.१) | by comparison |
| उपमाता | उपमातृ (१.१) | a comparer |
| दाता | दातृ (१.१) | becomes a giver |
| प्रतिष्ठाम् | प्रतिष्ठा (२.१) | of fame |
| खलु | खलु | indeed |
| तेभ्यः | तद् (४.३) | to them (the beautiful objects) |
| एव | एव | only |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भ | व्या | नि | हा | नी | र | गु | रे | त | द | ङ्गा |
| द्य | था | य | था | न | र्ति | त | था | त | था | तैः |
| अ | स्या | धि | क | स्यो | प | म | यो | प | मा | ता |
| दा | ता | प्र | ति | ष्ठां | ख | लु | ते | भ्य | ए | व |
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